अंबाह स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना, प्रवचन, प्रश्न मंच और महिला मंडल द्वारा सम्मान कार्यक्रम आयोजित हुआ। सांस्कृतिक नाटक और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। पढ़िए अजय जैन की ख़ास रिपोर्ट…
अंबाह। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में धर्म और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर पंडित आयुष शास्त्री ने “उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म” पर प्रवचन दिया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मचर्य केवल जीवन का अनुशासन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और समाज में नैतिक मूल्यों के पालन का मार्ग है। बच्चों और युवाओं को संयम, आत्मनियंत्रण और धर्म की गहराई से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में प्रश्न मंच का आयोजन विशेष आकर्षण रहा। रिटायर्ड शिक्षक महेश चंद जैन (झाबुआ) ने बच्चों से ब्रह्मचर्य धर्म से जुड़े प्रश्न पूछे। बच्चों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिए और प्रत्येक उत्तर में निहित नैतिक संदेश को आत्मसात किया। इस संवाद ने युवाओं में धर्म और अनुशासन के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न की।
बच्चों और युवाओं को पुरस्कृत किया
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत जैन सोशल ग्रुप महिला मंडल ने “सखी नाटक” प्रस्तुत करने वाले बच्चों और युवाओं को पुरस्कृत किया। नाटक में पारंपरिक कथाओं और धर्म शिक्षा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया था। महिला मंडल ने बच्चों की सराहना करते हुए उन्हें आगे भी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर को भव्य सजावट के बीच सामूहिक आराधना और अनुशासन के साथ अनुभव किया। श्रीमती रजनी जैन ने कहा कि सखी नाटक और प्रश्न मंच से बच्चों का आत्मविश्वास और प्रस्तुति कौशल भी बढ़ा है।
समापन सत्र में पंडित आयुष शास्त्री ने उपस्थित जनों को आशीर्वाद दिया और बताया कि अगला चरण क्षमा वाणी पर्व का होगा, जिसमें समाज मेलजोल और क्षमा संदेश के साथ एकता प्रदर्शित करेगा।
धर्म, संयम और सांस्कृतिक चेतना का उदाहरण
कपिल जैन केपी, आकाश जैन, अरिहंत मंडल के राहुल जैन एवं श्रेयांश जैन ने बताया कि इस आयोजन ने बच्चों, युवाओं और बड़ों के बीच धर्म, संयम और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। महिला मंडल और समाज के सहयोग ने इस पर्व को न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी सफल बना दिया। इस प्रकार, अंबाह का यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, अनुशासन और उल्लास का अद्वितीय संगम बनकर उभरा और पर्यूषण पर्व का समापन आध्यात्मिक उत्साह के साथ हुआ।













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