माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिये कि वे स्वयं तो शयन का सही तरीका अपनाये। साथ ही अपने बच्चों के शयन करने के तरीके पर भी ध्यान दें। उनकी गतिविधियॉ किस तरह की है इस पर नजर अवश्य ही रखें। दिए गए तरीकों को ध्यान रख उनका पालन करने हेतु बच्चों को सीख हमेशा देते रहें। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों के माध्यम से श्रीफल जैन न्यूज का कॉलम Life Management निरंतरता लिए हुए है। पढ़िए इसके 24वें भाग में श्रीफल जैन न्यूज के रिपोर्टर संजय एम तराणेकर की विशेष रिपोर्ट….
बच्चों के शयन का तरीका देखकर माता-पिता जानें उनकी मानसिकता
बच्चों के शयन के ढंग को देखकर माता-पिता अपने बच्चों की मानसिकता का अन्दाजा भी लगा सकते हैं।
– यदि बच्चा हाथ बाँधकर सिर के पीछे लगाकर, ऊपर मुँह करके सोया है तो समझना कि वह किसी बात से नाराज है और चिन्तातुर है।
– बच्चा तकिये या चादर को अपने सीने में दबाकर सोया है तो समझाना कि वह किसी बात से डरा हुआ है।
– बच्चा यदि एक करवट से अपना मुँह दबाकर/छिपाकर सोया है तो समझना कि वह आप से कुछ छिपा रहा है या आपसे बचना चाहता है।
– बच्चे का एक हाथ यदि पेट के नीचे दबा है और घुटनो को पेट तक मोड़कर एक करवट से सो रहा है तो वह आपसे सुरक्षा और निश्चितता का वातावरण चाहता है।
– यदि वह पेट के बल मुँह नीचे करके हाथो पर माथा रखकर सोता है तो वह किसी वजह से आपसे चिड़ गया है, आपसे बात नहीं करना चाहता, ऐसा समझना।
शयन के समय पैर दक्षिण दिशा में कदापि न करें। पूर्व दिशा में सिर करके सोने से बुद्धि बढ़ती है, दक्षिण दिशा में सिर करके सोने से स्वास्थ्य बना रहता है और कार्य सिद्धि होती है। पश्चिम दिशा में सिर करके शयन करने से चिन्ता बढ़ती है। उत्तर दिशा में सिर करके शयन करने से आयु घटती है। मरण के समय पैर दक्षिण दिशा में हो तो प्राण सुख से निकलते हैं।
दिन में शयन न करें। प्राकृतिक नियमों से मनुष्य का रात्रि शयन हितकर है। ग्रीष्म ऋतु में भोजन के बाद थोड़ा शयन करना यथोचित हितकर है।













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