अमरकंटक की पावन धरा पर सर्वोदय जैन तीर्थ में नवनिर्मित भव्य और विशाल जैन मंदिर में विश्व की सबसे बड़ी भगवान् श्री आदिनाथ की अष्टधातु की 24 टन की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। श्रीमज्जिनेन्द्र प्राणप्रतिष्ठा पंचकल्याणक गजरथ महामहोत्सव 25 मार्च से दो अप्रैल 2023 तक संपन्न होगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। शताब्दी के महान जैन साधक महामहिम दिगम्बराचार्य संत शिरोमणि विद्यासागर महाराज के सानिध्य में अमरकंटक की पावन धरा पर सर्वोदय जैन तीर्थ में नवनिर्मित भव्य और विशाल जैन मंदिर में विश्व की सबसे बड़ी भगवान् श्री आदिनाथ की अष्टधातु की 24 टन की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। श्रीमज्जिनेन्द्र प्राणप्रतिष्ठा पंचकल्याणक गजरथ महामहोत्सव 25 मार्च से दो अप्रैल 2023 तक संपन्न होगा। इसमें विश्व भर से समाजजन शामिल होंगे।
यह है विशेषता
जिस कमल पर प्रतिमा है, उसका वजन 17 टन है। गर्भगृह में भगवान आदिनाथ विराजित हैं। उस पर परम्परानुसार अष्टमंगल चिह्न भी उत्कीर्ण किए गए हैं। प्रतिमा का आभामंडल विशाल है। दाएं-बाएं चंवरधारिणी तथा इनके ऊपर मंगल कलश स्थापित हैं। द्वार शाखाओं एवं सिरदल पर कमल पुष्पांकन है। प्रतिमा के वक्ष स्थल पर जैन प्रतिमा लक्षण श्रीवत्स बना हुआ है। मंदिर के शिखर की ऊंचाई 151 फीट, लम्बाई 424 फीट और चौड़ाई 11 फीट है। भारत की प्रचीन पद्धति से बने जिनालय के मूलभवन में लोहे और सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया है। पत्थरों को तराश कर गुड़ के मिश्रण से आदिकालीन निर्माण की तकनीक का प्रयोग कर चिपकाया गया है। जिनालय में राजस्थानी शिल्पकारों की शिल्पकला अत्यंत मनमोहक है।













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