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पंचकल्याणक : ज्ञानतीर्थ पर आर्षमति माताजी का मंगल आगमन


सारांश

श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक के निमित्त श्री दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में गुरुदेव षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की अंतिम दीक्षित शिष्या गुरुमां गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ का ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक के निमित्त श्री दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में निरन्तर साधु-साध्वियों के आगमन हो रहे हैं। बीते दिनों परम पूज्य पट्टाचार्य श्री विनीतसागर जी महाराज (ससंघ), गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी ससंघ, गणिनी आर्यिका श्री सृष्टीभूषण माताजी ससंघ, आर्यिका श्री अंतसमति माताजी ससंघ, आर्यिका श्री कुमुदमती माताजी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ था।

अब गुरुदेव षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की अंतिम दीक्षित शिष्या गुरुमां गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ का ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ है। पूज्य गुरुमां का चातुर्मास मुरार में हुआ था। चूंकि ज्ञानतीर्थ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की घोषणा हो चुकी थी, इसलिए आर्यिका आर्षमति माताजी ने अन्यत्र दूरदराज विहार न करते हुए ग्वालियर के आसपास के क्षेत्र में ही पद विहार करते हुए धर्म प्रभावना की।

हुई आगवानी

ज्ञानतीर्थ पर विराजमान गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण, सृष्टीभूषण, स्वस्तिभूषण सहित सभी आर्यिका माताजियों एवं ब्रह्मचारिणी दीदीयों ने पूज्य गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी की अगवानी की। पूज्य गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी का महेशचंद बंगाली पवन जैन की फैक्ट्री पर रात्रि विश्राम हुआ। प्रातः के प्रवचन और आहारचर्या टी आर पुरम में आशीष जैन, सोनू, अतुल जैन के निज निवास पर हुआ।

निकाली गई शोभायात्रा

टी आर पुरम से ज्ञानार्ष भक्त परिवार के नेतृत्व में विशाल एवं भव्य शोभायात्रा प्रारम्भ हुई। शोभा यात्रा में महिलाएं केसरिया साड़ी में, पुरुषवर्ग सफेद परिधान में थे। सभी हाथों में ध्वज लिए हुए थे। मंगल प्रवेश के पश्चात पूज्य गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिमती माताजी एवं गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माताजी ने उपस्थित साधर्मी बन्धुओं को संबोधित करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।

गंज बसोदा के युवा साथियों के विद्यासागर बैंड वादकों ने सभी का मन मोह लिया। एक किलोमीटर से भी अधिक लम्बे जुलूस में ग्वालियर, मुरार, सुमावली, बानमोर, अम्बाह, पोरसा, जौरा, आगरा, धौलपुर सहित पूरे भारतवर्ष से सैकड़ों की संख्या में गुरुमां के भक्त मौजूद थे।

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