मुरैना में युगल मुनि श्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित पंच परमेष्ठि प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लेकर धर्म एवं संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतियोगियों का सम्मान समारोह में चांदी की माला और उपहार देकर अभिनंदन किया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
मुरैना नगर में धर्म के सिद्धांतों के प्रति रुचि बढ़ाने और लोगों को जैन महापुरुषों के जीवन चरित्र से परिचित कराने के उद्देश्य से पंच परमेष्ठि प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता नगर में चातुर्मासरत युगल मुनिराज मुनि श्री विलोक सागर जी और मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुई।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मनोज जैन और विमल जैन (बबलू) ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 8 वर्ष से लेकर 90 वर्ष तक के 200 से अधिक श्रावकों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य समाज में धर्म और संस्कृति की भावना को प्रबल बनाना था।
समारोह की शुरुआत रश्मि जैन द्वारा मंगलाचरण से हुई। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आर्जव सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन श्रावक श्रेष्ठियों के करकमलों से किया गया। ब्रह्मचारी राहुल भैया ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाए।
पूज्य युगल मुनिराजों ने अपने प्रवचन में कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं धर्म और संस्कृति की जिज्ञासा को जागृत करती हैं और श्रावकों को ज्ञान प्राप्ति की दिशा में प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में ज्ञान, दर्शन और चरित्र तीनों ही मोक्षमार्ग के मूल तत्व हैं, जिन्हें समझने और जीवन में अपनाने की प्रेरणा ऐसे आयोजनों से मिलती है।
ग्रुप सी में प्रिंसी हर्षित जैन ने 100 में से 100 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें पुण्यार्जक परिवार यतीन्द्रकुमार संजय रेखा जैन (मुरैना) द्वारा चांदी की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। ग्रुप ए और बी में भी कई प्रतियोगियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। खुशी जैन, साक्षी जैन, नित्या जैन, तान्या जैन, रजत जैन, कीर्ति जैन, पीहू जैन, अरिहंत जैन, राजकुमार जैन, गुंजन जैन, सौरभ जैन और अल्पना जैन को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया।
विजेताओं को उपहार और प्रमाणपत्र प्रदान किए
कार्यक्रम के अंत में पुण्यार्जक परिवार यतीन्द्रकुमार संजय रेखा जैन (मुरैना) और लखमीचंद लालजीराम जैन (बानमोर) के सौजन्य से सभी विजेताओं को उपहार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। समारोह में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले साधर्मी बंधुओं का भी सम्मान किया गया। पूरे आयोजन ने मुरैना नगर में धार्मिक जागरण और संस्कार संवर्धन की नई ऊर्जा का संचार किया। श्रद्धालुओं ने इसे आचार्य परंपरा की प्रेरणा से प्रेरित “धर्म ज्ञान उत्सव” के रूप में सराहा।













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