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पंच कल्याणक मेला और मनोरंजन स्थल नहीं हैं : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दी मंगल देशना


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति माताजी, गणनी आर्यिका श्री स्वस्तीभूषण माताजी संघ सहित 42 साधुओं के संघ सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ गरिमामय पूर्ण हुआ। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


पदमपुरा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति माताजी, गणनी आर्यिका श्री स्वस्तीभूषण माताजी संघ सहित 42 साधुओं के संघ सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ गरिमामय पूर्ण हुआ। एडवोकेट सुधीर अध्यक्ष, हेमंत सोगानी मंत्री, राजकुमार कोठारी कोषाध्यक्ष ने बताया कि रविवार को प्रात: श्रीजी का अभिषेक पूजन के बाद श्री ऋषभदेव को केवलज्ञान के बाद प्रात निर्वाण मोक्ष हुआ। मोक्ष कल्याणक के बाद अग्नि कुमार देव द्वारा सत्कार विधि, दीक्षार्थी मुन्नालाल की दीक्षा,125 फिट के नव निर्मित शिखर पर कलश और ध्वज का आरोहण, 111 फिट की धर्म ध्वजा की स्थापना, नूतन चौबीसी पर अभिषेक हुआ। सुरेश सबलावत ने बताया कि धर्म सभा में सुप्रसिद्ध भामाशाह श्रेष्ठि अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी,आरके मार्बल किशनगढ़, राजेंद्र कटारिया, राजेश शाह ने भगवान श्री पदम प्रभ और प्रथमाचार्य शांति सागर जी के चित्रों का अनावरण, दीप प्रज्वलन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की।

संसारी प्राणी की भांति गर्भ में आते हैं

इस अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गर्भकल्याणक से प्रारंभ हुई। रविवार को भगवान को मोक्ष हो गया। तीर्थंकर भगवान भी हमारे ही तरह संसारी प्राणी की भांति गर्भ में आते हैं। जन्म लेते हैं, राज्य का संचालन भी करते हैं और निमित पाकर वैराग्य संयम धारण कर आत्मा पर लगे। कर्मों को तप ,ध्यान रूपी अग्नि से भस्मीभूत नष्ट कर गुण स्थान में बढ़ते हुए केवल ज्ञान प्राप्त कर शेष 85 कर्म प्रकृति नष्ट कर 14 गुण स्थान से सिद्ध हो जाते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्री आदिनाथ भगवान सहित सभी 24 तीर्थंकरों के निर्वाण पर प्रकट किए।

नूतन चौबीसी पर प्रतिमाएं विराजित की

आचार्य श्री ने आगे बताया कि आज बालब्रह्मचारी श्री मल्लीनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस है। पूज्य होने से पूज्यता को प्राप्त होते है। 70 से 100 की उम्र होने पर भी वैराग्य के भाव परिणाम नहीं होते हैं। पंच कल्याणक मेला या मनोरंजन स्थल नहीं हैं। जीवन में परिवर्तन लाने से, जीवन धर्ममय होने से जीवन सार्थक होगा। सुरेश सबलवात के अनुसार भगवान के मोक्ष कल्याणक के बाद अग्नि कुमार देव द्वारा सत्कार विधि, दीक्षार्थी मुन्नालाल की दीक्षा, 125 फिट के नव निर्मित शिखर पर कलश ओर ध्वज का आरोहण देश के प्रसिद्ध भामाशाह श्रेष्ठि अशोक, सुरेश, विमल सुशीला, शांता, तारिका पाटनी आरके मार्बल किशनगढ़ ने किया। 111 फिट की धर्म ध्वजा की स्थापना ताराचंद जैन पोल्याका सुनील, नीलम परिवार ने की। श्री जी की रथ यात्रा के बाद नूतन चौबीसी पर पुण्यार्जक परिवारों ने प्रतिमाएं विराजित की।

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