मुरैना में 26 अक्टूबर को दिगंबर जैन साधु संतों के लिए पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन होगा। यह धार्मिक अनुष्ठान संयम, अहिंसा और त्याग का प्रतीक है। समारोह में युगल मुनिराज मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज की उपस्थिति रहेगी। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैन संत जैनेश्वरी दिगंबरी मुनि दीक्षा लेने पर सभी सांसारिक वस्तुओं, सुख सुविधाओं, वाहन आदि का त्याग कर देते हैं। वे केवल मोर पंखों से बनी पिच्छिका, कमंडल और शास्त्र रखते हैं, जो दिगंबर जैन साधु साध्वियों की पहचान भी हैं।
दिगंबर साधु केवल ज्ञान उपकरण के रूप में शास्त्र, शौच उपकरण के रूप में कमंडल, और संयम उपकरण के रूप में पिच्छिका रखते हैं। पिच्छिका का प्रयोग दैनिक क्रियाओं में निरंतर परिमार्जन हेतु किया जाता है। पिच्छिका का महत्व इतना है कि बिना इसके साधु सात कदम भी नहीं चल सकते।
मोर पंखों की कोमलता घटने पर पिच्छिका को परिवर्तित किया जाता है, और यह समारोह अधिकांशतः वर्षायोग के समापन पर किया जाता है। मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बताया कि यह अनुष्ठान संयम, त्याग और अहिंसा का प्रतीक है।
भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह 26 अक्टूबर को होगा। प्रातः 07 बजे श्री जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टदृव्य से पूजन होगा। 07.30 बजे से श्री भक्तामर महामंडल विधान एवं युगल मुनिराजों के प्रवचन होंगे। दोपहर 01 बजे पिच्छिका परिवर्तन समारोह होगा और वर्षायोग कलशों का वितरण भी किया जाएगा।
चातुर्मास के चार महीने पूर्ण होने पर युगल मुनिराज श्री सिद्ध परमेष्ठि की भक्तियां एवं स्तुति कर चातुर्मास निष्ठापन करेंगे। समारोह के पश्चात 26/27 अक्टूबर को युगल मुनिराज मुरैना से पोरसा के लिए मंगल पद बिहार कर सकते हैं। पोरसा में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 अक्टूबर से 06 नवंबर तक आयोजित होगा।













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