चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुधींद्र सागर और क्षुल्लक श्री अकम्प सागर महाराज का चातुर्मास के दौरान धर्म सभा का आयोजन किया गया। पढ़िए धरणेन्द्र जैन की खास रिपोर्ट
खैरवाड़ा। चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुधींद्र सागर और क्षुल्लक श्री अकम्प सागर महाराज का चातुर्मास के दौरान धर्म सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अनिल जैन ने बताया कि मुनि श्री ने कहा, “डिजिटल कैमरे से बाहर की तस्वीरें आती हैं, किंतु हड्डी-पसली के भीतर क्या है, यह जानने के लिए हमें एक अलग कैमरे की आवश्यकता होती है, जो डॉक्टर के पास होता है।
इसी प्रकार, अंतरात्मा को जानने और देखने के लिए ज्ञान रूपी कैमरे के लिए डॉक्टर रूपी गुरु के पास जाना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा, “दो आंखों से देखने पर केवल बाहरी वस्तुएं दिखाई देती हैं, जैसे कार की हेडलाइट से बाहर की वस्तु। लेकिन कार के भीतर की वस्तु नहीं दिखती। इसके लिए हमें कार के अंदर तीसरी लाइट जलानी पड़ती है।
इसी तरह, दो नेत्रों से केवल बाहरी वस्तु दिखाई देती है, जबकि भीतर की आत्मा नहीं। आत्म स्वरूप को देखने के लिए ज्ञान रूपी तीसरा नेत्र खोलना आवश्यक है। यही कारण है कि आत्म दर्शन के लिए ज्ञानार्जन करना चाहिए।”













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