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गुरुओं का सान्निध्य पुण्यशाली जीवों को ही मिलता है : मुनिश्री विलोकसागरजी का धौलपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ गूंजे जयकारे


जब तक श्रावक हैं, तभी तक श्रमण परंपरा कायम हैं। जब श्रावक ही नहीं होगें, तो श्रमण परंपरा स्वतः समाप्त हो जाएगी। दिगंबर साधुओं की परंपरा को जारी रखने में श्रावकों का ही योगदान है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागरजी ने धर्मसभा को में व्यक्त किए। धौलपुर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


धौलपुर। जब तक श्रावक हैं, तभी तक श्रमण परंपरा कायम हैं। जब श्रावक ही नहीं होगें, तो श्रमण परंपरा स्वतः समाप्त हो जाएगी। दिगंबर साधुओं की परंपरा को जारी रखने में श्रावकों का ही योगदान है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागरजी ने धर्मसभा को में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन और गुरुओं का सान्निध्य पुण्यशाली जीवों को ही मिलता है। जिनका पुण्य क्षीर्ण होता है, उनको न प्रभु के दर्शन मिलते हैं और न ही गुरुओं का सान्निध्य मिलता है। अपने समाज में ही, आपके आसपास अनेकों ऐसे लोग भी होंगे, जो कभी मंदिर भी नहीं जाते होंगे और यदि उनको यह मालूम पड़ जाए कि आज महाराज जी आ रहे हैं तो वे कोई न कोई बहाना बनाकर रफूचक्कर हो जाते हैं। मुनिश्री ने कहा कि हे भव्य आत्माओं, अनेकों जन्मों के पुण्य कर्म से आपको मानव पर्याय में जन्म मिला है, वो भी जैन कुल में। इसे यू ही बर्बाद मत करो।

साधुओं की साधना में सहयोगी बनें 

जब भी आपको मौका मिले, अवसर मिले तब तुरंत प्रभु के दर्शन कर लो, उनकी पूजा भक्ति कर लो। जब भी आपको दिगंबर साधुओं का सान्निध्य मिले या जब भी कोई दिगंबर साधु आपके नगर में प्रवेश करे तो आपका कर्तव्य है कि उनकी संयम की साधना में सहयोगी बनें। साधुओं के आगमन पर ऐसी व्यवस्था करें कि उन्हें अपनी साधना करने में कोई परेशानी अथवा व्यवधान न हो। उनके आहार, विहार, निहार, स्वाध्याय एवं सामयिक आदि के लिए उचित प्रबंध करें। यही श्रावकों का परम कर्तव्य है।

गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली 

धौलपुर नगर में मंगलवार को आचार्यश्री विद्यासागर महाराज, आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज का नगरागमन हुआ। मुरैना से पद विहार करते हुएमुनिश्री ने प्रातःकालीन बेला में प्रवेश किया। धौलपुर जैन समाज के लोगों ने नगर सीमा पर पहुंचकर युगल मुनिराजों की भव्य अगवानी की। उन्हें गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराते हुए जैन मंदिर ले जाया गया। मुनि श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं।

इनकी मौजूदगी रही खास 

गुरुदेव के भव्य मंगल प्रवेश पर मुरैना से बृजेश जैन दादा, राकेश जैन, सुनील जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। धौलपुर जैन समाज के अध्यक्ष धनेश जैन, महामंत्री अमित जैन, धर्मशाला अध्यक्ष पवन जैन, अजय जैन, बनवारीलाल जैन ,नवाब रवि जैन, पवन जैन जवाहर नगर, पवन जैन कोषाध्यक्ष, अमित जैन, मानिक चंद, गुड्डा जैन प्रेस वाले, दीपेंद्र जैन, कमलकिशोर जैन आदि मौजूद रहे।

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