छत्रपति नगर आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में धर्म प्रभावना बह रही है। समाजजन इसका पुण्यार्जन कर रहे हैं। उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री का तीर्थ स्वरूप सुमति धाम जिनालय परिसर में 27 अप्रैल से होने जा रहा पट्टाचार्य पदारोहण समारोह इस सदी का प्रथम और दुर्लभतम एक ऐसा समारोह साबित होगा, जो भूतो न भविष्यतिः। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। पुण्योदय जिनका प्रबल होता है। उन्हें ही मुनियों के दर्शन, प्रवचन, सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है। इंदौर नगर के लोगों के पुण्य का नियोग है कि उन्हें इस पंचमकाल में चर्या शिरोमणि के रूप में बहुचर्चित आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के पट्टाचार्य पदारोहण समारोह के निमित्त से एक साथ 450 से अधिक मुनि, उपाध्याय, आचार्य, आर्यिका और ऐलक, क्षुल्लक के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होने जा रहा है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह उद्गार उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने छत्रपति नगर आदिनाथ जिनालय में प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। आपने कहा कि आचार्य श्री का तीर्थ स्वरूप सुमति धाम जिनालय परिसर में 27 अप्रैल से 2 मई तक होने जा रहा पट्टाचार्य पदारोहण समारोह इस सदी का प्रथम और दुर्लभतम एक ऐसा समारोह साबित होगा जो भूतों न भविष्यति। आपने सभी से आह्वान किया कि सौभाग्य आपको मिला है कि आप सभी इस महोत्सव के साक्षी बनंे और संतों की सेवा वैयावृत्ति कर पुण्यार्जन करें।
धर्म सभा में वरिष्ठ मुनि श्री क्षीर सागर जी महाराज ने एक भजन के माध्यम से जीवन का सार बताया और कहा कि शरीर नश्वर है। आत्मा अजर-अमर है। तुम्हें आत्म कल्याण के लिए जैन कुल और देव शास्त्र गुरु का सानिध्य मिला है। इसे व्यर्थ मत गंवाओ और आत्म कल्याण के लिए पुरुषार्थ करो। धर्मसभा में डॉ. जैनेंद्र जैन, अखिलेश सोधिया, वीरेंद्र जैन, अरविंद सोधिया आदि समाज जन उपस्थित रहे। धर्म सभा का संचालन भूपेंद्र जैन ने किया।













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