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पर्युषण के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म का महात्म्य समझाया: अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने उत्तम शौच धर्म पर शांतिधारा एवं मांगलिक क्रिया करवाईं


अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने पर्युषण के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म का महात्म्य समझाया। परिवहन नगर में रविवार को मुनिश्री के सानिध्य में पर्युषण पर्व पर उत्तम शौच धर्म के दिन शांतिधारा एवं मांगलिक क्रिया की गईं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने पर्युषण के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म का महात्म्य समझाया। परिवहन नगर में रविवार को मुनिश्री के सानिध्य में पर्युषण पर्व पर उत्तम शौच धर्म के दिन शांतिधारा एवं मांगलिक क्रिया की गईं। दीप प्रज्वलन और पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट के पुण्यार्जक इंद्र चेतन, भारती, अर्चित, आरव जैन, चंदन, अंजना, धैर्य माही रावका परिवार रहे। रविवार को सुबह 7 बजे गुरुदेव के मुखारविंद से अभिषेक शांति धारा हुई। 7.45 बजे प्रीति लोकेंद्र, टीसा लोकेंद्र जैन का 3 उपवास के बाद पारणा गुरुदेव के आशीर्वाद से हुआ। 8 बजे से नित्य नियम पूजन, पुष्पदंत भगवान, महावीर स्वामी पूजन, सोलह कारण पूजन, पंचमेरू पूजन, दसलक्षण धर्म पूजन संगीतकार जैनम जैन ने करवाया। गुरुदेव के प्रवचन 10 बजे से हुए। इस अवसर पर आचार्य अभिनंदन सागर जी महाराज, आचार्य वर्धमान सागर जी की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलन करने, अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर जी के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट प्रमोद, सुलेखा, दीपेश चंदेरिया, चेतन, भारती, अर्चित, आरव जैन, ऋषभ रजनी जैन ने किया।

शाम को 6 बजे प्रतिक्रमण, सामायिक ध्यान मुनिश्री पूज्यसागर जी ने करवाया। रात्रि 8.15 बजे आरती भक्ति तथा मुनिश्री के शौच धर्म पर प्रवचन हुए। 9.30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन महावीर नवयुग मंडल ने करवाया। यह जानकारी परिवहन नगर के श्रेष्ठी जैन ने दी।

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