राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं में नैतिक चेतना, शांति एवं अहिंसा के मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग की ओर से युवा अहिंसा प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। लाडनू से पढ़िए, यह खबर…
लाडनू। राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं में नैतिक चेतना, शांति एवं अहिंसा के मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग की ओर से युवा अहिंसा प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. बलबीरसिंह, विभागाध्यक्ष अहिंसा एवं शांति विभाग ने उद्बोधन में कहा कि आज का युवा केवल ऊर्जा का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सबसे सशक्त शक्ति है। यदि यह ऊर्जा अहिंसा, संवाद और करुणा के मूल्यों से जुड़ जाए तो समाज में स्थायी शांति की स्थापना संभव है। उन्होंने अहिंसा को कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल और नैतिक साहस का सर्वाेच्च रूप बताया।

अहिंसा की समकालीन प्रासंगिकता रेखांकित
इस अवसर पर विभाग के सह आचार्य डॉ. रविंद्रसिंह ने युवाओं को आत्मानुशासन, सकारात्मक सोच एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि अहिंसा केवल दार्शनिक अवधारणा नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन का आधार है। सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने कहा कि आज के समय में अहिंसा युवाओं को आंतरिक शांति के साथ-साथ सामाजिक समरसता की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने जैन दर्शन के आलोक में अहिंसा की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया और युवाओं से इसे अपने आचरण में अपनाने का आह्वान किया तथा प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से संवाद, सहनशीलता, आत्म संयम एवं शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान जैसे विषयों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान किया। कार्यक्रम में 64 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।













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