दिगम्बर जैन मंदिर क्लर्क कॉलोनी में आज अंतर्मुखी पूज्यसागर महाराज के परम सानिध्य में सुबह भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद आरती की गई। आरती में बड़ी संख्या में भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। मुनिश्री ने बारह भावना प्रवचन माला के अंतर्गत प्रथम भावना अथिर भावना पर्य प्रवचन देते हुए कहा कि संसार में कोई भी स्थिर नही। पढ़िये प्रवीण जैन की रिपोर्ट ……….
इन्दौर। दिगम्बर जैन मंदिर क्लर्क कॉलोनी में परमपूज्य अंतर्मुखी पूज्यसागर महाराज के परम सानिध्य में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद आरती की गई। आरती में बड़ी संख्या में भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। मुनिश्री ने बारह भावना प्रवचन माला के अंतर्गत प्रथम भावना अथिर भावना पर प्रवचन में देते हुए कहा कि संसार में कोई भी स्थिर नहीँ है। सूरज चांद निकलते -छिपते हैं, डूब जाते है, ऋतु आती है, जाती है और आरे में जैसे लकड़ी कटकर कम होती जाती है, उसी प्रकार हमारी सबसे प्यारी,आयु भी कम होती जा रही है और हमें पता ही नहीं चलता।
जहा अनन्त सुख है, दुःख का नामो निशान नहीं
जगत की सम्पति इंद्रजाल और आकाश में बने महल के समान अथिर है जो कुछ क्षण में मात्र विलीन हो जाते हैं, केवल एकमात्र सिद्ध पदस्थिर है, जहां अनन्त सुख है, वहां दुःख का नामो निशान भी नहीं है, इसलिये उसे प्राप्त करने के लिए सभी प्राणियों संसार को अथिर विचार कर परम पद प्राप्त करने का प्रयास पहली प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिये।













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