निवाई में आर्यिका 105 श्री शीतलमति माताजी ने आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज के निर्यापकत्व में सम्यक समाधि मरण प्राप्त किया। जैन समाज में शोक व श्रद्धा का माहौल है।
निवाई (राजस्थान) । जैन समाज के लिए यह अत्यंत भावुक और श्रद्धा से भरा क्षण रहा, जब आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज की संघस्था, यम सलेखन धारिणी परम पूज्य आर्यिका 105 श्री शीतलमति माताजी ने आज दिनांक 31 जनवरी 2026, सायं 6:07 बजे, राजस्थान के निवाई नगर में सम्यक समाधि मरण प्राप्त किया। विमान यात्रा 1 फरवरी 2026 को निकलेगी ।
आचार्य श्री के निर्यापकत्व में सलेखना पूर्ण
आर्यिका माताजी ने आचार्य श्री के निर्यापकत्व में पूर्ण संयम, समता और शांति भाव के साथ सलेखना व्रत को पूर्ण किया। अंतिम क्षणों में संघ, श्रावक-श्राविकाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनकी आंखें नम और मन श्रद्धा से भरा रहा।
साधना और तप का जीवंत उदाहरण
आर्यिका श्री शीतलमति माताजी का सम्पूर्ण जीवन तप, त्याग, साधना और संयम का आदर्श उदाहरण रहा। उन्होंने संघ और समाज को आत्मशुद्धि, सहनशीलता और समभाव का संदेश दिया।
जैन समाज में शोक और श्रद्धा
माताजी के समाधि मरण की सूचना मिलते ही जैन समाज में शोक की लहर फैल गई। देश-विदेश से श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण वंदन और श्रद्धांजलि अर्पित की।













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