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जिसको धोख दी जाती है उसे कभी धोखा मत देना,यह बर्बादी का कारण बनता है-मुनिपुंगव श्री सुधासागरजीः अज्ञानी बनकर स्वाध्याय करो 


हमारी अच्छी जिंदगी में जो कुछ भी बुरा है जो कुछ भी बुराइयां है, बुरा क्षेत्र है, बुरा काल है, बुरी संगति ये सब मेरे सीमित ही नहीं, नष्ट हो जाये, ये भावनाएं जो व्यक्ति भाता है, उसकी होनहार नियम से भली होगी, किसी ज्योतिषाचार्य से पूछने की जरूरत नही, तुम्हारा भविष्य बहुत अच्छा होने वाला है। कभी जो तुम्हारे पूज्य हो, आदर्श हो, जिनके कभी चरण छुए हो उनके सामने कभी झूठ मत बोलना और असत्य को कभी सत्य मत कहना। निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने यहां धर्मसभा में प्रवचनों के माध्यम से जीवन के रहस्यों को समझाया। पढ़िए कटनी से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर…


कटनी। हमारे अच्छे कार्य, हमारी अच्छी जिंदगी, हमारा अच्छा क्षेत्र, हमारा अच्छा काल, अच्छी संगति, अच्छे भगवान, अच्छे गुरु जो कुछ भी अच्छा है, वह हमारी जिंदगी में असीम हो जाए। जो कुछ भी बुरा है जो कुछ भी बुराइयां है, बुरा क्षेत्र है, बुरा काल है, बुरी संगति ये सब मेरे सीमित ही नहीं, नष्ट हो जाये, ये दो भावनाएं जो व्यक्ति भाता है, उसकी होनहार नियम से भली होगी, किसी ज्योतिषाचार्य से पूछने की जरूरत नही, तुम्हारा भविष्य बहुत अच्छा होने वाला है नियम से। आप कभी गुरु या माँ बाप से चलाकर के झूठ बोले हो, गलत को सही सिद्ध करने का प्रयास किया हो अपने पूज्य, आदर्श, अपने उपकारी के सामने, जो तुम्हारे लिए जीता हो, सब कुछ तुम्हारे लिए करता हो, यदि कभी तुमने झूठ को सत्य सिद्ध करने का प्रयास किया तो अपने आप को अपराधी घोषित कर दीजिए। कभी जो तुम्हारे पूज्य हो, आदर्श हो, जिनके कभी चरण छुए हो उनके सामने कभी झूठ मत बोलना और असत्य को कभी सत्य मत कहना। इतना भी कर लिया तो तुम कितनी ही बड़ी गलती कर लोगे, वो गलती तुम्हारी माफ हो जाएगी और सजा से तुम बच जाओगे।

जहाँ रास्ता सीधा, वहां गुरु की जरूरत नहीं 

जिसको धोख दी जाती है उसको कभी धोखा मत देना, यह बर्बादी का कारण बनता है। जहाँ रास्ता सीधा हो, वहां गुरु की जरूरत नहीं है, गुरु की जरूरत उस चौराहे पर पड़ती है, यहां चारों तरफ रास्ते जा रहे हैं और हमें सही रास्ते का ज्ञान नहीं है, वहीं तो गुरु चाहिए। सहज भाव से देखो, देखना बुरा नहीं है, ताकना बुरा है। ताकने में गृद्धता है, ताकने में पाप है, ताकने में वासना है, देखना तो आत्मा का स्वभाव है। सहज दृष्टि आ जाये- सहज कानों में शब्द आ रहे हैं, सहज बोलना, प्री प्लानिंग नहीं। दिन भी प्री प्लानिंग में नही, सहजता में निकल जाए। किसी ने प्रशंसा या निंदा कर दी सहज भाव। सहजता पूर्वक तुम अपनी आत्मा को देखना, आत्मा कभी झूठ नहीं बोलती, वह तो इतनी सहज-सरल है, जिस दिन आत्मा इतनी सहज, सरल बन जाएगी, उसी दिन तुम संसार के सबसे बड़े धर्मात्मा बन जाओगे और तुम्हारी आत्मा को सत्स्वरूप का दर्शन होगा।

हमारे दोष हमारे दर्पण में झलके 

सहज भाव एक ऐसा दर्पण है जिसमें अपने सारे दोष भगवान को दिखे या न दिखे, स्वयं को जरूर दिखने लगे जायेंगे। भगवान को हमारे दोष नहीं दिखते, वो तो देखते ही नहीं है, उनको मतलब भी नहीं है, हमारे दोष हमारे दर्पण में झलके। भगवान के ज्ञान में हमारे गुण-दोष नहीं झलकना है, हमारी आत्मा हमारा दर्पण बन जाये और हम खुद देखें कि मेरे में दोष क्या है और वो आएगा सहज भाव में।

भगवान को केवल ज्ञान होता है 

भगवान को केवल ज्ञान होता है तो सारी दुनिया झलकती है और आत्मा को ज्ञान होता है तो स्वयं के दोष झलकते है, गुण नहीं। सम्यकदृष्टि को कभी ज्ञान में गुण देखने में नहीं आते और जो-जो आत्मा के गुण देखने में आ रहे हैं, उनको सम्यकदर्शन हुआ ही नहीं। अपनी खुद की बुराई खुद में दिखने लग जाए तो समझना तुम सम्यकदृष्टि हो, भव्य हो और सहज वैराग्य तुममें जाग गया है।

गुरु का काम दोषों से बचाना 

जिस दिन तुम्हें अपने दोष दिखने लग जाए, उस दिन तुम गुरु के पास जाना, गुरु महाराज मुझे अपने दोष नजर आने लगे हैं, अब इन दोषों से बचाओ। गुरु का काम दोष निकालना नहीं है, दोषों से बचाना है। मैं पापी हूँ, ऐसी अनुभूति हो तो गुरु को खोज लेना, गुरु वो स्नान ग्रह है जब तक गंदगी की अनुभूति न हो, स्नान ग्रह में जाने से क्या फायदा है?

अज्ञानी बनकर स्वाध्याय करो 

गुरु तो स्नान करायेंगे, गुरु तो पाप धुलायेंगे। ज्ञानियों के लिए शास्त्र नहीं लिखे गए है, तुम ज्ञानी बनाकर स्वाध्याय करोगे तो कभी स्वाध्याय का आनंद नहीं आएगा, अज्ञानी बनकर स्वाध्याय करो। गुरु के पास कभी ज्ञानी बनकर मत जाना, आपको प्रवचन समझ नही आएगा, अपने को दोषी मानकर गुरु के पास जाना तो तुम फ्रेश होकर लौटोगे।

छोटों के दोष को सही मत कह देना 

माँ बाप, गार्जियन से मेरा कहना है-अपनी गलती छुपाने के लिए कभी अपने से छोटों के दोष को सही मत कह देना, यह तुम्हारी बर्बादी का कारण बनेगा। यदि आप हो गार्जियन हो, सौ बार मेरी निंदा हो तो हो, गलत को गलत कहूंगा वह कहेगा तुम भी तो करते हो, कहना-मैं पापी हूँ तो हूँ, तू क्यों पापी बन रहा है, ये है अच्छे बाप का लक्षण।

मेरा संबंध जिनेंद्र देव से 

तुम असफल हुये हो, तुम असमर्थ हो, तुम किसी कार्य को करने के लायक नहीं, हर कार्य में तुम फेल हुए हो तो ऐसे व्यक्ति को खोजो जो सफल हो गया हो, जिसका ज्ञान, जिसका विचार, जिसकी दृष्टि शुद्ध हो, जिसकी वाणी निर्दाेष हो और जो कभी हमसे संबंध नहीं बनाएगा और हम उससे सम्बंध बनाकर गर्व से कहेंगे कि मेरा संबंध जिनेंद्र देव से है।

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