कस्बे की बांडियागढ़ पहाड़ी पर स्थित अहिंसा जीव दया तृप्ति उद्यान एक अनूठा स्थल है, जहां हजारों पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था की गई है। यहां प्रतिदिन हजारों पक्षी अपना दाना-पानी चुगने आते हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि मिश्रौली निवासी स्वर्गीय नेमीचंद पाटनी को बचपन से ही पशु-पक्षियों से विशेष स्नेह था। पढ़िए सौरभ जैन की यह विशेष रिपोर्ट…
मिश्रौली। कस्बे की बांडियागढ़ पहाड़ी पर स्थित अहिंसा जीव दया तृप्ति उद्यान एक अनूठा स्थल है, जहां हजारों पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था की गई है। यहां प्रतिदिन हजारों पक्षी अपना दाना-पानी चुगने आते हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि मिश्रौली निवासी स्वर्गीय नेमीचंद पाटनी को बचपन से ही पशु-पक्षियों से विशेष स्नेह था। भगवान महावीर के “जियो और जीने दो” के सिद्धांत से प्रेरित होकर उन्होंने 50 वर्ष पहले बांडियागढ़ पहाड़ी पर पक्षियों के लिए अनाज डालना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे उन्होंने अन्य लोगों को भी इस कार्य के लिए प्रेरित किया। हालांकि, कुछ समय बाद अन्य लोगों ने अनाज डालना बंद कर दिया, लेकिन नेमीचंद पाटनी ने स्वयं जाकर पक्षियों के लिए अनाज डालना जारी रखा।
वे हर वर्ष जन सहयोग से लगभग 20 क्विंटल अनाज खरीदते थे और रोजाना 6 किलो अनाज पक्षियों के चुगने के लिए डालते थे। पक्षियों को कुत्तों से बचाने के लिए, उन्होंने 25 वर्ष पहले पहाड़ी पर 20 फीट चौड़ा, 40 फीट लंबा और 7 फीट ऊंचा चबूतरा बनाया। वृद्धावस्था के कारण उन्होंने अपने खर्चों पर पक्षियों के लिए अनाज डालने के लिए एक कर्मचारी भी रखा था। नेमीचंद पाटनी हमेशा पशु-पक्षियों के लिए अनाज डालने के लिए प्रेरित करते थे। वे कस्बे में आवारा कुत्तों के बीमार होने पर उनका इलाज भी कराते और उनके लिए भोजन का प्रबंध करते थे। 2021 में उनका निधन हो गया, जिसके बाद यह कार्य उनके पुत्र राजेंद्र कुमार पाटनी ने संभाला। इसके बाद, सरपंच जगमाल सिंह चौहान और जन सहयोग से अहिंसा जीव दया तृप्ति उद्यान की स्थापना की गई।
अध्यक्ष भरत राम पाटीदार ने बताया कि सभी का एक ही लक्ष्य है कि बेजुबान पक्षी कभी भूखा न रहे। यह उद्यान डेढ़ बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां अब रोजाना पक्षियों के लिए 30 से 40 किलो अनाज डाला जाता है। उनके विश्राम के लिए करीब 200 से अधिक छोटे-बड़े पौधे भी लगाए गए हैं, और इस वर्ष बरसात में और पौधे लगाने का लक्ष्य है। समिति के सदस्यों को सूचना मिलने पर आसपास के इलाकों से घायल पक्षियों को लाकर उनका इलाज किया जाता है।
इसके अलावा, गर्मी में प्रतिवर्ष गांव में जगह-जगह बेजुबान पक्षियों के लिए पानी के परिंडे लगाए जाते हैं। जन्मदिवस, वैवाहिक वर्षगांठ, पुण्यतिथि और अन्य विशेष अवसरों पर लोग स्वेच्छा से पक्षियों के लिए अनाज दान करते हैं। यह उद्यान सचमुच एक जीवित उदाहरण है कि कैसे हम सभी मिलकर प्रकृति की रक्षा कर सकते हैं और बेजुबान प्राणियों के प्रति करुणा दिखा सकते हैं।













Add Comment