टीकमगढ़ की नंदीश्वर कॉलोनी में जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती तीर्थंकर कल्याणक के रूप में मनाई गई। सुबह 6:00 बजे युवाओं द्वारा पारसनाथ धाम से आदिनाथ धाम तक बाइक रैली निकाली गई। इसके बाद भव्य जुलूस भी निकाला गया। इस अवसर पर मुनि श्री सुधा सागर महाराज के प्रवचन भी हुए। पढ़िए ये राजीव सिघई की विशेष रिपोर्ट…
टीकमगढ़। शहर की नंदीश्वर कॉलोनी में जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती तीर्थंकर कल्याणक के रूप में मनाई गई। सुबह 6:00 बजे युवाओं द्वारा पारसनाथ धाम से आदिनाथ धाम तक बाइक रैली निकाली गई। प्रातः 6:30 बजे से ही भक्तों का अपार जन समुदाय आदिनाथ धाम में एकत्रित होने लगा था। सुबह 7:00 बजे निर्यापक मुनि श्री108 सुधा सागर जी महाराज का पारसनाथ धाम से आदिनाथ धाम में आगमन हुआ।
मुनि श्री के सानिध्य में आदिनाथ धाम में आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा मुनि श्री के मुखारविंद से संपन्न हुई। मुनि श्री के द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ 108 कलशों से भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया गया। अभिषेक करने का प्रथम सौभाग्य गुलाब जैन बंधा एवं संजय मोदी को प्राप्त हुआ।
किए फल वितरित
सुबह 9:30 जैन समाज के युवाओं ने आदिनाथ भगवान की जन्म महोत्सव के अवसर पर जिला अस्पताल पहुंचकर मरीजों को फल वितरित किए। इसके बाद 10:00 से गांधी चौराहा पर एवं नजाई गेट के सामने मिष्ठान वितरण किया गया।

भगवान का नाम लेकर चोरी मत करना
प्रातः 8:15 से पारसनाथ नाथ धाम में मुनि श्री सुधा सागर महाराज के प्रवचन शुरू हुए। मुनि श्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि तुम लोग कोई भी पाप देव शास्त्र गुरु का नाम लेकर मत करना। तुम चोरी करते हो लेकिन भगवान का नाम लेकर चोरी मत करना। यह सबसे निकृष्ट पाप कहलाता है। इसलिए पुण्य कार्य करते समय बहुत बड़ी सावधानी रखनी पड़ती है। मुनि श्री ने कहा कि एक पाप होता है, एक निकृष्ट पाप होता है, एक महानिकृष्ट पाप होता है, एक अपराधी होता है। एक महाअपराधी होता है, एक खूंखार अपराधी होता है। जैन दर्शन के अनुसार आप लोग व्यापार धंधा करते हैं, इसमें पाप लगता है लेकिन यह पाप निकृष्ट पाप की श्रेणी में नहीं आता। यह पाप दुर्गति का कारण नहीं बनता है। जो पाप पूरे समाज के सामने, कानून के सामने, परिवार के सामने किया जाता है, वह पाप महापाप की श्रेणी में नहीं आता।
निकाला गया जुलूस
दोपहर 1:15 बजे से पारसनाथ धाम जैन मंदिर से जुलूस शुरू हुआ। टीकमगढ़ शहर के सभी मंदिरों के श्रीजी इस जुलूस में शामिल हुए। जुलूस के बीच-बीच में अनेक झांकी जुलूस की शोभा बढ़ा रही थीं। जुलूस में हाथी-घोड़ा, बग्घी, बैंड, डीजे, अहिंसा दिव्य घोष, टीकमगढ़ शहर के सभी महिला मंडल नंदीश्वर महिला मंडल, माता त्रिशला महिला मंडल, मुनि श्री सुधासागर महिला मंडल, पारसनाथ महिला मंडल, आदिनाथ युवा मंडल, नंदीश्वर युवा मंडल, जय जिनेंद्र कार्यकारिणी, वीर व्यायामशाला, मुनि सेवा समिति और अनेक मंडल जुलूस में नाचते-गाते चल रहे थे। नंदीश्वर महिला मंडल, सदस्य जुलूस में जगह-जगह अपनी कला का प्रदर्शन दिखाते हुए चल रही थीं। जुलूस का संपूर्ण नगर में भव्य स्वागत किया गया। समाज के लोगों ने घर-घर श्रीजी की आरती उतारी एवं पुष्प वर्षा की। लोग अपने घर के बाहर पानी एवं शरबत पिला रहे थे। मिश्रा चौराहे पर टीकमगढ़ विधायक राकेश गिरी ने पुष्प वर्षा कर जुलूस का भव्य स्वागत किया। इसके बाद 4:00 बजे जुलूस राजेंद्र पार्क पहुंचा।
न्यायालयों में हो ऋषभदेव की तस्वीर
यहां मुनि श्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि आज टीकमगढ़ ने इतिहास रच दिया है। विश्व के लोग टीकमगढ़ के इतिहास को चैनल के माध्यम से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऋषभदेव गणतंत्र के संस्थापक थे। उन्होंने सबसे पहले गणतंत्र की स्थापना की। भगवान ऋषभदेव विश्व की वैज्ञानिकता को चुनौती दे सकते हैं। भले आपके यहां वैज्ञानिकता है लेकिन एक राष्ट्रीय वैज्ञानिकता ऋषभदेव की देन है। मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक न्यायालय के अंदर ऋषभदेव की फोटो होना चाहिए क्योंकि उन्होंने लाखों वर्ष पहले कानून बनाकर न्याय व्यवस्था एवं दंड व्यवस्था की शुरुआत की थी। मुनि श्री ने कहा कि आज से लाखों वर्ष पहले भगवान ऋषभदेव ने कृषि करना सिखलाया था। सारे किसान जैन नहीं होते, जैन धर्म को नहीं मानते लेकिन उन किसानों को यह जानकारी होना चाहिए कि आप लोग जो खेती कर रहे हैं, उन्हें सबसे पहले ऋषभदेव ने हल चलाना सिखाया था। मुनि श्री के प्रवचन के बाद श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा मुनि श्री के मुखारविंद से संपन्न हुई।













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