समाचार

राष्ट्रीय कवि दयाचंद जैन का देह परिवर्तन: अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की अलख जगाने वाले का स्वर थम गया


शहर के ख्यात राष्ट्रीय कवि और संगम बारां के जिलाध्यक्ष दयाचंद जैन का मंगलवार को देह परिवर्तन हो गया। उनके देहावसान की खबर से जहां सकल जैन समाज में शोक व्याप्त हो गया तो वहीं जिले सहित राजस्थान के साहित्य जगत भी शोक संतप्त है। शहरवासियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। बारां राजस्थान से पढ़िए, प्रीतम लखवाल की यह खबर…


बारां (राजस्थान)। शहर के ख्यात राष्ट्रीय कवि और संगम बारां के जिलाध्यक्ष दयाचंद जैन का मंगलवार को देह परिवर्तन हो गया। उनके देहावसान की खबर से जहां सकल जैन समाज में शोक व्याप्त हो गया तो वहीं जिले सहित राजस्थान के साहित्य जगत भी शोक संतप्त है। दयाचंद जैन की कविताओं के माध्यम से जहां लोगों में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक चिंतन और धार्मिकता के अंश प्रवाहमान रहते थे। जैन के स्वर थमने से जहां बारां शहर में निर्वात पैदा हुआ है तो राजस्थान प्रदेश और हाड़ौती अंचल में भी कभी न भर पाने वाला शून्य स्थापित हुआ है। दयाचंद जैन ने सभी विषयों पर बेखौफ होकर लिखा। वे समाजसेवा में भी अग्रणी भूमिका निभाते रहे। राष्ट्रीय कवि संगम बारां के जिलाध्यक्ष दयाचंद जैन शहर के रोटरी क्लब में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका से समाज सेवा, नर सेवा का प्रतिमान स्थापित कर रहे थे। रोटेरियन दयाचंद जैन को स्थानीय सकल जैन समाज, रोटरी क्लब, लायंस क्लब सहित शहर की सभी साहित्यिक संस्थाओं के प्रमुखों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

जन्म दिन पर ही हुआ महाप्रयाण
यह अजीब इत्तेफाक रहा कि मंगलवार 20 मई को का उनका जन्म दिवस भी था। परिजनों ने उन्हें जन्मदिन पर शुभकामनाएं देने की यथायोग्य तैयारियां की थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था कि अपने जन्म दिन पर ही उनकी दिव्यात्मा देह छोड़ परमात्मा में विलीन हो गई। उनका रचा साहित्य आने वाले समय में भी समाज, देश का मार्गदर्शन करेगा। उनके लिखे शब्द नव साहित्यकारों को प्रेरणा प्रदान करेंगे। ईश्वर शोक संतप्त परिवार को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

You cannot copy content of this page