संसार के भोग विलास को त्यागकर संयम के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। आज के युग में भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार करने वाले विरले ही होते हैं। रविवार को आचार्य वसुनंदी महाराज के चातुर्मासिक स्थल फिरोजाबाद में ऐसा ही एक विरला दृश्य देखने को मिला, जहां चांदपुर दिमनी के नत्थीलाल जैन ने संयम जीवन को स्वीकार कर अपना जीवन आत्मा के उद्धार और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
अंबाह। संसार के भोग विलास को त्यागकर संयम के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। आज के युग में भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार करने वाले विरले ही होते हैं। रविवार को आचार्य वसुनंदी महाराज के चातुर्मासिक स्थल फिरोजाबाद में ऐसा ही एक विरला दृश्य देखने को मिला, जहां चांदपुर दिमनी के नत्थीलाल जैन ने संयम जीवन को स्वीकार कर अपना जीवन आत्मा के उद्धार और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। यहां आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य जैन दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें तीन दीक्षाएं प्रदान की गईं।
आचार्य श्री के सानिध्य में दीक्षा समारोह से श्रद्धालुओं का उत्साह द्विगुणित हो गया। हजारों की संख्या में विशाल जन समुदाय इस भव्य दीक्षा समारोह का साक्षी बनने के लिए उपस्थित था। समारोह में आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने नत्थीलाल जैन को विधि-विधान पूर्वक क्षुल्लक दीक्षा प्रदान कर दयानंद जी महाराज नाम दिया। उन्हें नवीन पिच्छी, कमंडल और शास्त्र भी भेंट किए गए। आयोजन में ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन आदि धार्मिक कार्य भी संपन्न कराए गए। समारोह में दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने के लिए राज्यसभा सांसद नवीन जैन भी पधारे। इस अवसर पर आर्यिका संघ भी मौजूद था।
दीक्षा लेना कठिन काम
आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में दीक्षा लेना बहुत कठिन कार्य है, यह कांटों से भरा ताज पहनने के समान है। किंतु यदि हम किसी कठिन कार्य को करने की ठान लें, तो वह कार्य भी सरल लगने लगता है। जैनेश्वरी दीक्षा बिरले ही ले पाते हैं, क्योंकि यह संयम का मार्ग है। उन्होंने कहा कि जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उमड़ सकता है, और संसार में रहकर प्राणी संसार को तज सकता है। इससे पहले, ब्रह्मचारी ब्रह्म प्रकाश भैया उर्फ़ नत्थीलाल जैन ने आचार्य श्री से क्षुल्लक दीक्षा देने के लिए निवेदन किया। आचार्य श्री ने उनकी संयम साधना को देखते हुए दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की।
दीक्षा देने से पूर्व आचार्य श्री ने ब्रह्मचारी ब्रह्म प्रकाश भैया के परिजनों, रिश्तेदारों, उपस्थित जन समुदाय और संघस्थ सभी साधुओं से दीक्षा के लिए स्वीकृति प्राप्त की। इस दौरान दीक्षार्थी ने संसार के सभी जीवों से जानबूझकर या अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की और अपनी ओर से सभी जीवों को क्षमा किया।
आयोजन में नत्थीलाल जैन के परिजन संतोष जैन, नीलेश जैन और दीपक जैन सहित मुरैना से लगभग चार सैकड़ा लोग उपस्थित थे।













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