नांदणी में पंचकल्याण महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। बुधवार को भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इस आयोजन में इसमें उत्तर और दक्षिण के 8 आचार्य परमेष्टी भगवन एक साथ एक मंच मौजूद हैं। यह अद्भुत नजारा देखकर समाजजन आनंदित हो रहे हैं। पढ़िए नांदणी से यह खबर…
नांदणी (महाराष्ट्र)। नांदणी में पंचकल्याण महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इसमें उत्तर और दक्षिण के 8 आचार्य परमेष्टी भगवन एक साथ एक मंच विराजित रहे। यह अद्भुत नजारा देखने को मिला। कर्मवीर मजिस्टेट जयसिंगपुर के संचालक सुकुमार पाटील ने बताया कि नवपटाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज ससंघ, आचार्यश्री 108 धर्मसेनजी महाराज ससंघ, आचार्यश्री 108 जिनसेनजी महाराज ससंघ, आचार्यश्री 108 मयंक सागरजी महाराज ससंघ, आचार्यश्री 108 शांतिसेनजी महाराज ससंघ,प. पू. आचार्यश्री 108 धर्मभूषणजी महाराज ससंघ, आचार्यश्री 108 सुयशगुप्तीजी महाराज ससंघ का जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव में मंगल सानिध्य प्राप्त हो रहा हैं।
युवा साथी भक्तिमय नृत्य में रहे लीन
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि नववर्ष में नांदणी पंच कल्याण महोत्सव के प्रथम दिन गर्भ कल्याणक पूर्वार्ध संपन्न हुआ। घटयात्रा चल समारोह में जैन ध्वजा को लेकर सबसे आगे-आगे हाथी चल रहा था। सौभाग्यशाली महिलाएं केशरिया परिधान में सिर पर मंगल कलश लेकर चल रहीं थी। बैंडबाजों की मधुर धुन पर युवा साथी भक्तिमय नृत्य कर रहे थे।
गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया
घटयात्रा में लाए गए शुद्ध जल से वेदी, मंच और पांडाल की शुद्धि की गई और ध्वजारोहण किया गया। पंचकल्याणक महा महोत्सव में भगवान कैसे बनते हैं, इसको दर्शाते हुए 1 जनवरी को गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें माता की कोख में भगवान का जीव आता है। इस जीव के गर्भ में आने से 6 माह पहले ही भगवान के पिता के गृह आंगन में दिन में 4 बार रत्नों की वर्षा होती है। जिससे उनके राज्य काल में कहीं कोई दरिद्रता, गरीबी नहीं होती है सब जीव प्रसन्न होते हैं।
साधुओं का एक साथ बैठना आनंद का क्षण
आचार्य भगवन विशुद्धसागर महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि नांदणी पंचकल्याणक में उत्तर और दक्षिण के साधु का एक साथ बैठना समाज में आनंद का क्षण हैं। आचार्य भगवन विशुद्धसागर महाराज जी ने कहा कि साल के प्रथम दिन की शुरुआत महाराष्ट्र के नांदणी की पावन धरा पर जैन धर्म के सबसे बडे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ प्रारंभ हुआ है।













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