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मुनिश्री योगसागरजी महाराज का हुआ केशलोच : मुनियों के 28 मूलगुणों में से एक अनिवार्य क्रिया 


आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री योगसागर महाराज ने भीषण शीतलहर के बीच अपने केशों का लोचन किया। आज गुरुदेव का उपवास भी रहेगा। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री योगसागरजी महाराज ने भीषण शीतलहर के बीच अपने केशों का लोचन किया। आज गुरुदेव का उपवास भी रहेगा। दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार अपने केशलोच (बालों को हाथ से उखाड़ना) की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं। यह मुनियों के 28 मूलगुणों में से एक अनिवार्य क्रिया है, जो शरीर के प्रति अनासक्ति, आध्यात्मिक बल और सहनशीलता का प्रतीक है।

केशलोच सहज साधना नहीं 

केशलोच प्रक्रिया के मुख्य बिंदु के तहत अनिवार्य नियम- दिगंबर साधु हर 2 से 4 महीने में अनिवार्य रूप से अपने बाल उखाड़ते हैं। यह एक उत्कृष्ट साधना है पंचम युग में केवल दिगंबर संत ही कर सकता है। बिना किसी औजार के बालों को उखाड़ना यह एक बिरला साधक ही कर सकता है। इन भाव विहल दृश्यों को जो भी देखता है वह भावुक हो उठता है। यह कोई सहज साधना नहीं है।

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