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इस धरा का, इसी धरा पर, सब धरा रह जाएगा - मुनिश्री विलोकसागर का मुरैना में संदेश : सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन, कल महायज्ञ और भव्य रथयात्रा


मुरैना में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आज समापन हुआ। मुनिश्री विलोकसागरजी ने कहा कि पुण्यवान जीवों को ही अनुष्ठान करने का अवसर मिलता है और जीवन के अंत में केवल कर्म ही साथ जाते हैं। कल प्रातः महायज्ञ एवं भव्य रथयात्रा का आयोजन होगा। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। आठ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के समापन अवसर पर बड़े जैन मंदिर मुरैना में निर्यापक श्रमण मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान और विधान करने का अवसर केवल पुण्यशाली जीवों को प्राप्त होता है।

धन होते हुए भी नहीं मिलता है अनुष्ठान का अवसर

मुनिश्री ने बताया कि कई धनी लोग होते हुए भी धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर नहीं पा पाते, जबकि एक सामान्य व्यक्ति भी पुण्य प्रबल होने पर ऐसे पवित्र कार्य कर लेता है। इसलिए यदि धन पुण्य से प्राप्त हुआ है, तो उसका उपयोग धार्मिक और पवित्र कार्यों में करना चाहिए।

दिल्ली से आए पुण्यार्जक परिवार ने कराया आठ दिवसीय विधान

कैलाशचंद राकेशकुमार जैन परिवार (दिल्ली) ने मुरैना आकर आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने सहभागिता कर पुण्य अर्जित किया। मुनिश्री ने कहा कि इस विधान से प्राप्त शिक्षा और संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं, क्योंकि इस संसार में एकत्रित धन-संपत्ति धरा पर ही रह जाती है, केवल अच्छे-बुरे कर्म ही जीव के साथ जाते हैं।

अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित

विधान के अंतिम दिन मुनिश्री विलोकसागरजी और मुनिश्री विबोधसागरजी के सान्निध्य में विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी द्वारा अभिषेक, शांतिधारा और पूजा-अर्चना कराई गई। इसके बाद 1024 अर्घ्यों का समर्पण कराया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना में सहभागिता की।

कल होगा महायज्ञ, निकलेगी भव्य रथयात्रा

विधान के सफल समापन अवसर पर कल प्रातः 7:30 बजे विश्व शांति और कल्याण की भावना से महायज्ञ आयोजित होगा, जिसमें धूप, घी और जड़ी-बूटियों की आहुतियाँ दी जाएंगी।

प्रातः 8:30 बजे श्री जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिमा को रथ पर विराजित कर नगर के प्रमुख बाजारों से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा बड़ा जैन मंदिर पहुंचकर पूर्ण होगी, जहां पाण्डुक शिला पर जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद प्रतिष्ठाचार्य और अतिथियों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में कैलाशचंद राकेशकुमार जैन पूणारावत परिवार, दिल्ली की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था की गई है।

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