मुनि श्री सुधाकरसागर जी ने कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है। ये सबको अपने में समाहित कर लेता है। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
अशोकनगर। भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि भक्त को निर्णय करना है, उसका भगवान कैसा हो। कल्पना आती है कि हमारा बेटा हो, आपके मन में विचार आता है कि आपकी बहूं कैसी है। आप मकान खरीदने पर विचार करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मेरे पड़ोसी कैसा हो ऐसा ही आपको विचार करना है कि मेरा गुरु कैसा हो जो गुण तुम्हारे अंदर नहीं है वो गुरु होना चाहिए। मात्र संत शब्द से गुरु नहीं हो सकता आचारण देखा जाता है श्रीराम के नाम के साथ आचरण देखो सारी दुनिया श्री राम के आदर्श को अपनाने को तैयार रहते हैं एक प्रसंग आता है। सीता जी की कोई ग़लती नही थी मन से वचन से काय से किसी भी प्रकार से कहीं गलती हो ही नहीं सकती थी। महासति सीता कहती हैं कि गलती मेरी है। मैं इतनी सुंदर क्यों थी रावण की दृष्टि मेरे तरफ गई ये होती है। महान व्यक्तित्व की विशेष आपके परिणाम ख़राब होते ही नही कैसे होते हैं। महासति सीता जी गलती नहीं होने पर भी अपनी ग़लती मान रहे हैं।
शोभायात्रा के साथ एक मंच पर सोलह संत
आज हम सब का एक माह के बाद सौभाग्य जगा। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज का विशाल संघ 16 पिच्छिका के साथ चार गुना बढ़कर आए। हम सब को मुनि श्री के सान्निध्य में श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महा महोत्सव विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया, मुकेश भैया के निर्देशन में मनाने जा रहे हैं। आइये हम सब अपने मन को अयोध्या की ओर ले चले।
शोभायात्रा के साथ मुनि श्री का हुआ नगर प्रवेश
एक माह के दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के प्रवास के वाद परम पूज्य का दोपहर बाद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जहां जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, आडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोन जी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई ने नगर के बाहर पहुंचकर श्रीफल भेंट किए। इसके बाद भव्य शोभायात्रा के साथ नगर प्रवेश कराया। जहां यह शोभायात्रा पार्श्वनाथ मंदिर, पछाड़ी खेड़ा रोड, बगीचा मंदिर, गांधी पार्क रेस्ट हाउस, भगवान महावीर स्वामी मार्ग, आचार्य श्री विद्यासागर दारा होते हुए सुभाष गंज पहुंचे। जहां भव्य धर्मसभा को संबोधित किया।
व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है समझें
मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है। समझें विफलता दिखा रही है कि आपने सही तरीके से पुरुषार्थ नहीं किया। अज्ञानी व्यक्ति का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वह विफल होने पर निराश हो जाता है। वह हर किसी पर आरोप लगाने लगता है। आप जिस वस्तु को चाह रहे हैं वह नहीं मिली तो उसका आरोप किसी अन्य व्यक्ति पर लगा देते हैं तो आगे भी विफल होंगे यहां तक कि आप गाड़ी सावधानी से चला रहे थे। कोई सामने आकर टकरा जाए आपकी गाड़ी बड़ी थी। वह आप को गालियां देगा। आपकी ग़लती नही है फिर भी आपने शांति से सुन लिया तो शांति से सुनने का चमत्कार देखना आगे आपको ऐसी कठिनाई नहीं होगी।













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