जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंधई मोनू की यह खबर…
थूवोनजी। जिसको देखकर ऐसा भाव आए कि इसकी शरण में जाकर सबकुछ समर्पित कर दूं, वहां तुम्हारा हित होगा। जिसके मन में ये भाव आ जाएं कि मैं इनकी शरण में चला जाऊं। जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।
तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि 23 नवंबर की तारीख इस अंचल के भक्तों के लिए एक नई सौगात लेकर आई रही है। इस दिन मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज असीम क़ालीन भक्तावर मंडल विधान के रूप में एक रक्षा कवच इस अंचल के ही नहीं देशभर से आ रहे भक्तों को देने जा रहे हैं। इस दिन प्रातः काल की बेला में दर्शनोदय के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी के दरबार में रजत मांडने पर असीम क़ालीन भक्तामर मंडल विधान के कलशों की स्थापना होगी। इस के लिए एक बार भक्त को 111 श्रीफल की राशि भेंट करनी होगी। इसके आजीवन विधान का सौभाग्य आपको प्राप्त होता रहेगा। प्रति वर्ष क्षेत्र कमेटी आपको एक चांदी की मुद्रा एवं नंद्यावर्त देती रहेगी, जो वर्ष भर बड़े बाबा के दरबार में मंत्री हो आपको अपने घर ले जाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
इन्होंने किया विधान में शामिल होने का आग्रह
दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन महामंत्री, मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ.जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद ने इसमें भाग लेने का आग्रह किया है।
जो तुम्हारी दृष्टि में मंगल हो वह तुम्हारे जीवन का मंगल करेगा
मुनिश्री ने कहा कि जो तुम्हारी दृष्टि में मंगल हो, वह तुम्हारे जीवन का मंगल करेगा। अभी तुम्हारी दृष्टि में कोई मंगल था ही नहीं लेकिन, जैसे ही तुम ने अपना भला करने वाले का ध्यान किया। तुम्हारे लिए लगने लगा कि इस दुनिया में कोई तो हमारा है, तुम मेरी नकल मत करना। तुम तो मेरी अक्ल से चलना, मेरी अक्ल अपने जीवन को अच्छा बनने के लिए ले लेना, सफलता मिल जाएगी।
संसार में आपकी दृष्टि में सबसे श्रेष्ठ मंगल कौन से हैं फिर आगम से तुलना कर अपने गुरु से विचार-विमर्श करना। जो मैंने उत्तम माना है वह आगम से गुरु जनों ने भी जिसे श्रेष्ठ माना है। अब उसे आगे कर देना तुम्हारा मंगल ही मंगल होगा।













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