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मुनिश्री सिद्ध सागर जी ने कहा- त्याग से मुक्ति मिलती है: नांद्रे में मुनिराजों की मधुर वाणी से आध्यात्मिक चेतना निखर रही 


स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों मुनिराजों के चातुर्मास से माहौल धर्ममय बना हुआ है। यहां पर रोजाना मुनियों की अमृतवाणी से सकल समाजजन और श्रावक-श्राविकाएं पुण्य लाभ अर्जित कर रही हैं। मुनिराजों के प्रवचन के अलावा नित श्रीजी का पूजन, अभिषेक, आरती और विधानादि के कार्यक्रम में भक्ति, आराधना का दौर भी जारी है। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर…


नांद्रे। स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों मुनिराजों के चातुर्मास से माहौल धर्ममय बना हुआ है। यहां पर रोजाना मुनियों की अमृतवाणी से सकल समाजजन और श्रावक-श्राविकाएं पुण्य लाभ अर्जित कर रही हैं। मुनिराजों के प्रवचन के अलावा नित श्रीजी का पूजन, अभिषेक, आरती और विधानादि के कार्यक्रम में भक्ति,आराधना का दौर भी जारी है। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी ,मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी यहां भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मासरत हैं। इस पावन वर्षायोग में मुनियों के मंगल आशीर्वाद से समाजजनों को आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि मुनि श्री सिद्ध सागरजी ने प्रवचन में कहा कि किसी बात की प्रमाणिकता व्यवहार से होती है, जो हम लोगों को कल देखने को मिली। हम संख्या में भले ही कम हैं लेकिन, हमंे चाहने वाले बहुत अधिक हैं। रैली में जैन ही नहीं संपूर्ण धर्म के लोग एक साथ थे।

जैन समाज अच्छा, सीधा-साधा समाज है। कभी किसी से गलत व्यवहार नहीं करता और अच्छे लोगों का सभी साथ देते हैं। माधुरी हथिनी प्रतिदिन भगवान के दर्शन करती थी। जिनसेन भट्टारक जी, सभी मुनिराजों कि सेवा, मंदिर की सेवा के साथ दिन में एक बार आहार करते हैं। उसके भी अभी चातुर्मास में एक दिन आहार के बाद एक दिन उपवास चल रहा है। ऐसे पुण्यात्मा, धर्मात्मा जीव के साथ गलत व्यवहार करोगे तो देव भी स्वीकार नहीं करते। नांदणी चातुर्मास में जिनसेन भट्टारक जी सबसे ज्यादा मेरे साथ आहार करने जाते थे परंतु, कभी भी हमारे बराबर पाटा पर नहीं बैठे। हमसे पहले आहार शुरु नहीं करते थे। ऐसे विनयवान व्यक्ति का पुण्य आज देखने को मिल रहा है। जिनसेन भट्टारक जी के लिए यही कहना है कि हम पर भले ही संकट आया पर चिंता मत करना साथ देनेवाले बहुत हैं, संकट चला जाएगा।

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