सड़क दुर्घटनाओं में जैन साधुओं के घायल होने की वारदात थमने का नाम नहीं ले रही है। लापरवाही से वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने से संयमी, तपस्वी साधुजनों को विहार के दौरान इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़ता है। सकल जैन समाज इस तरह की घटनाओं पर पहले भी चिंता जता चुका है और विहाररत साधुओं की सुरक्षा की मांग करते आ रहा है। शासन-प्रशासन मूक बना हुआ है। इंदौर से पढ़िए, हरिसिंह चौहान की यह खबर…
इंदौर। मुनिश्री शास्वतसागर जी गिरनार यात्रा के दौरान विहार रत थे। सुरेंद्र नगर से गिरनारजी के बीच सड़क दुर्घटना में वे गंभीर घायल हो गए। उन्हें सिर और शरीर पर अन्य स्थानों पर चोट लगी है। इस तरह का समाचार समाज के विभिन्न समूह पर आया है। आचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री शास्वत सागर जी महाराज जो कि सुरेंद्र नगर से गिरनार यात्रा पर थे, उनका रोड़ एक्सीडेंट हुआ है। दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठीजनों ने कहा कि महानुभाव यह हमारे मुनिराजों के साथ दुर्घटना मात्र नहीं है। अभी गिरनार की ओर यात्रा हो रही है, इसके पीछे उन लोगों का षड़यंत्र भी हो सकता है।
इसके लिये हम सभी को सक्रियता से राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कर हमारे मुनिराजों तथा जैन धर्मालंबियों की सुरक्षा की मांग सशक्त रूप से रखना होगी अन्यथा ऐसे ही हमारे मुनिराज घायल होते रहेंगे। सभी लोग इस बात पर ध्यान दें और मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजें। अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करें। खासकर तीर्थ क्षेत्र कमेटीएवं राज्य सरकार पर दबाव बनाया जाए। जैन मुनियों की सुरक्षा के प्रति सहजता राज्य सरकारों का काम है लेकिन, जरा सी लापरवाही बहुत महंगी पड़ रही है।
जैन समुदाय के लोगों को अपने मुनिराजांे की सुरक्षा के प्रति आवाज उठानी पड़ेगी। विहार कर रहे मुनियों के प्रति जागरूकता से उन्हें चातुर्मास के लिए विहार करने में ऐसी परेशानी नहीं होगी। जहां भी जिस शहर, गांव में जैन मुनियों का आवागमन चल रहा हो तो वहां के समाज और समाज के पदाधिकारियों को स्थानीय पुलिस थाने में जानकारी देना ही चहिए और जैन साधु संतों-साध्वियों माता जी आदि को हम सुरक्षित रुप से विहार करने में मदद करें। चुप रहने से कुछ नहीं होगा। मिलकर एकजुटता के साथ हमारे संतों के लिए आगे आना ही होगा।













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