भोपाल में पंचकल्याणक चल रहा है। यहां मुनिराजों के प्रवचनों का जैन समाज के लोग धर्मलाभ ले रहे हैं। शुक्रवार को मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी महाराज ने समय की महत्ता के बारे में उद्बोधन दिया। भोपाल से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की खबर…
भोपाल। भोपाल पंचकल्याणक में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि खिला फूल भी मुरझाता है और बंद कली भी खिलती देखी जाती है। समय बदलते देर नहीं लगती। बंधुओं, ये पंक्तियां सिर्फ कविता नहीं हैं, ये जीवन का सच हैं। इस धरती पर कुछ भी स्थायी नहीं है। न सफलता, न असफलता; न दुःख, न सुख। एक पल जो हमें तोड़ता है, अगला वही हमें जोड़ सकता है। जब कोई फूल मुरझाता है, हम दुखी हो जाते हैं, लेकिन, क्या हमने कभी सोचा कि उसी पौधे पर नई कली फिर से मुस्कुराने को तैयार होती है? तो अगर आज आप थके हैं, टूटे हैं, निराश हैं। याद रखिए, आप मुरझाए हैं, लेकिन खत्म नहीं हुए। मुश्किल वक्त आने का मतलब ये नहीं कि आप हार गए हैं, इसका मतलब है बदलाव आ रहा है। जैसे बंद कली को खिलने के लिए समय चाहिए होता है, वैसे ही हर इंसान के जीवन में वो खिलने का वक्त आता है। मगर शर्त सिर्फ एक है आप विश्वास बनाए रखें।
कोई भी बीज खुद को मिट्टी में दबने देता है, अंधेरे में सड़ता है, लेकिन अंदर एक विश्वास पलता है कि मैं अंकुर बनूंगा और एक दिन आसमान छू लूंगा। तो अगर आज हालात आपके पक्ष में नहीं हैं, तो घबराइए मत। मुरझाना जरूरी है, क्योंकि वो ही तो हमें सिखाता है कि खिलना कितना कीमती है। मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी महाराज कहते हैं कि बस एक बात याद रखिए वक्त बदलने में देर नहीं लगती, लेकिन बदलते वक्त में टिके रहने वाला ही जीतता है।













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