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ज्ञान का भंडार हैं मुनिश्री सारस्वत सागर जी: मुनिश्री जयंत सागर जी ने दीक्षा दिवस पर किया मुनिश्री का गुणानुवाद 


 मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने नांद्रे में अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जन्म सबको मिलता है। ऐसे ही मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज को भी मनुष्य पर्याय मिला परन्तु, आज के समय युवाओं और बच्चे अपने जीवन में क्या करना हैं, निर्णय नहीं ले पाते। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर…


नांद्रे। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि आचार्य विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर विराजमान हैं। मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने नांद्रे में अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जन्म सबको मिलता है। ऐसे ही मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज को भी मनुष्य पर्याय मिला परन्तु, आज के समय युवाओं और बच्चे अपने जीवन में क्या करना हैं, निर्णय नहीं ले पाते। सोच-विचार में ही समय निकाल देते हैं, परन्तु, मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज जी में अपनी छोटी सी मात्र 16 वर्ष की आयु में ही निर्णय कर लिया कि मुझे भगवान बनना हैं और निकल पड़े राग से वैराग्य के मार्ग पर और बन गए भरत से मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज। मुनिराज का जन्म मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, मजना (गांव) में हुआ। इनके दो भाई, एक बहन हैं। इनकी मां सुनीता जैन, पिता विनय जैन हैं।

इनकी पढ़ाई दसवीं तक हुई और 19 वर्ष की आयु में 6 अक्टूबर, 2017 को इंदौर (म.प्र) में दीक्षा आठ ब्रह्मचारी भाइयों के साथ हुई थी तो आज इन्हें अपने संयम के आठ वर्ष पूर्ण हो रहे है और इन्होने अपनी छोटी सी उम्र गुरु आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से दिगम्बर मुनि दीक्षा धारण की और गुरु आज्ञा में रहकर खूब अध्ययन, स्वाध्याय, तप, साधना की और आज सबसे छोटी उम्र में इतना ज्ञानी और प्राकृत, संस्कृत के अद्‌भूत जानकार बन चुके हैं। आज उनके दीक्षा दिवस पर कोटी -कोटी नमोस्तु

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