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मुनिश्री ने मंगल विहार में घायल पक्षी को सुनाया णमोकार मंत्र: जैन दर्शन का सिद्धांत परस्परो ग्रहों जीवानाम चरितार्थ


मुनि श्री विकसंत सागर महाराज आदि 14 पिच्छी साधु संतों का मंगल विहार रामगंजमंडी नगर की ओर है। बुधवार सुबह गुरुदेव संघ ने रूपनगर स्थित विद्यालय से देवरीघटा की ओर मंगल विहार किया। इसी दौरान मुनिश्री ने घायल पक्षी को कमंडल से पानी पिलाया और णमोकार मंत्र सुनाया। मुनिश्री के साथ विहार में रामगंजमंडी के कई मुनि भक्त श्रावक शामिल है। रामगंजमंडी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


 रामगंजमंडी। मुनि श्री विकसंत सागर महाराज आदि 14 पिच्छी साधु संतों का मंगल विहार रामगंजमंडी नगर की ओर है। बुधवार सुबह गुरुदेव संघ ने रूपनगर स्थित विद्यालय से देवरीघटा की ओर मंगल विहार किया। मंगल विहार के दौरान रामगंजमंडी के कई भक्त महाराज श्री के साथ मंगल विहार में सम्मिलित थे। तभी रामगंज मंडी के भक्त संजय जैन ने एक पक्षी को घायल अवस्था में देखा। उनका कहना था कि मेरे और पक्षी के बीच में लगभग 150 मीटर की दूरी होगी और तुरंत ही गुरुदेव को इसके बारे में विहार के दौरान बताया गया।

मुनिश्री तुरंत संघ सहित पक्षी के समीप पहुंचे और उसे घायल अवस्था में देख उसके ऊपर अपने कमंडल से जल छिड़कर उसे चेतन अवस्था में लाए। शायद उस पक्षी का पुण्य उदित हो रहा था और उस समय उस पक्षी के कुछ प्राण शेष थे और मुनिश्री के श्रीमुख से णमोकार मंत्र सुना। निर्ग्रंथ संत तो सभी का कल्याण मार्ग प्रशस्त करते हैं।

जैन दर्शन का सिद्धांत परस्परो ग्रहों जीवानाम चरितार्थ हो गया। निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि भगवान महावीर का दिव्य संदेश जियो और जीने दो का मूलमंत्र सार्थक हो गया। रामगंज मंडी नगर के कई भक्त मंगल विहार में सम्मिलित हैं। वह पक्षी का णमोकार मंत्र सुनकर प्राणांत हो गया। गुरु की महिमा वर्णी न जाए गुरु नाम वचो मन वचन काय। यह जानकारी प्रदीप शाह, नितिन जैन ने दी।

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