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उपाध्याय श्री विरंजन सागर ससंघ का हुआ छतरपुर में भव्य आगमन : इंसान से परमात्मा बनने की यात्रा में मुनिराज ने दी क्षुल्लिका दीक्षा


जनसंत श्री विरंजन सागर जी का छतरपुर नगर में मंगल आगमन बड़ा मंदिर बजरिया में हुआ, जिसमें समस्त समाज ने भव्य अगवानी की। इस अवसर पर उन्होंने कमलारानी को क्षुल्लिका दीक्षा दी। पढ़िए राजेश रागी / रत्नेश जैन बकस्वाहा की रिपोर्ट…


छतरपुर। परम पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी मुनिराज के शिष्य उपाध्याय जनसंत श्री विरंजन सागर जी का छतरपुर नगर में मंगल आगमन बड़ा मंदिर बजरिया में हुआ, जिसमें समस्त समाज ने भव्य अगवानी की। मुनिश्री के ससंघ के सानिध्य में विगत कई दिनों से समाधिमरण की प्रक्रिया में चल रहीं कमलरानी पुष्पा देवी जैन महेवा वाले ने प्रबल मंगल भावना से मुनिराज ससंघ को दीक्षा के लिये श्रीफल भेंट किया। मुनिराज ससंघ ने आशीर्वाद देते हुये गुरुवार को दोपहर में क्षुल्लिका संस्कार किये और जिसमें 11 प्रतिमाव्रतों के मंत्रों द्वारा संस्कार इंसान से परमात्मा की यात्रा करने हेतु सूर्य मंत्र दिया ताकि उनका इस भव का कल्याण हो और समाधि मरण करके अपने जीवन का कल्याण कर सकें।

दिया नया नाम

मुनिश्री ने कमलारानी जी के सिर पर स्वास्तिक बनाकर संस्कार किए और नया नाम क्षुल्लिका पुष्पश्री माताजी दिया। मुनिश्री ने क्षुल्लिका जी के हाथों में मयूर पिच्छी एवं कमण्डल प्रदान किया। कई जन्म के पुण्य के योग से यह पद प्राप्त होता है। मुनिश्री ने आगे कहा कि पंचकल्याणक में पाषाण से भगवान बनाते हैं लेकिन अब पुष्पश्री माता जी की इंसान से परमात्मा बनने की यात्रा प्रारंभ हुई है। मुनिराज ससंघ की आगवानी और पुष्पश्री दीक्षा समारोह में सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष उपस्थित रहे।

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