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सनावद में मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी ने स्वतंत्रता दिवस पर समाजजनों को पराधीनता से स्वाधीनता का मार्ग बताया : आत्मा को कर्मों से मुक्त कर वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करने का संदेश दिया


स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी महाराज ने उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए बताया कि केवल भौतिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि आत्मिक स्वतंत्रता ही वास्तविक स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि आत्मा को कर्मों से मुक्त कर परमात्मा बनाने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम में आहारदान भी दिया गया। पढ़िए सन्मति जैन काका की पूरी रिपोर्ट…


सनावद। स्वतंत्रता दिवस पर सन्मति जैन काका के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी महाराज ने उपस्थित समाजजनों को संबोधित किया। मुनि जी ने कहा कि आत्मा कर्मों की बेड़ियों में जकड़ी हुई है। इसे परमात्मा बनाने के लिए पराधीनता से स्वाधीनता का मार्ग अपनाना आवश्यक है। जब कर्मों से मुक्ति मिलेगी, तभी आत्मा सही मायनों में स्वतंत्र होगी और मोक्ष महल प्राप्त कर सकेगी।

स्वतंत्र होने का प्रयास करना ही वास्तविक स्वतंत्रता

मुनि जी ने समाजजनों को यह शिक्षा दी कि पराधीनता छोड़कर स्वतंत्र होने का प्रयास करना ही वास्तविक स्वतंत्रता है। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस हमें केवल भौतिक आज़ादी ही नहीं, बल्कि आत्मिक आज़ादी की भी शिक्षा देता है। इस अवसर पर मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी को आहारदान देने का सौभाग्य स्वतंत्रता सेनानी परिवारों—दिनेश एवं नरेश पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही मुनि श्री साध्य सागर महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य स्वतंत्रता सेनानी कैलाश चंद जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में सभी समाजजन उपस्थित रहे और मुनि श्री की वाणी से प्रेरणा ग्रहण की।

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