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मुनि स्वरूपानंदजी ने सल्लेखना व्रत में साधना पूर्ण कर ली समाधि : मुनि मार्दव सागर जी के सानिध्य में णमोकार मंत्र सुनते हुए मोक्ष लक्ष्मी का वरण


पलासिया दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और पूर्व मंदिर पदाधिकारी श्री सूर्यपाल की बड़नगर वाले ने सल्लेखना व्रत धारण कर मुनि स्वरूपानंद जी के रूप में अपनी आत्मा को समाधि में स्थिर किया। मुनि श्री ने आचार्य मार्दव सागर जी के सानिध्य में शांत परिणामों से मोक्ष मार्ग को प्राप्त किया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। पलासिया दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी तथा जावरा वालों के जैन मंदिर के पदाधिकारी रहे श्री सूर्यपाल की बड़नगर वाले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने अपनी मृत्यु को सन्निकट जानकर उसे मांगलिक रूप देने हेतु सल्लेखना व्रत धारण किया और आचार्य श्री मार्दव सागर जी से मुनि दीक्षा लेकर मुनि स्वरूपानंद के रूप में निर्विकल्प जीवन अपनाया।

आज सायं 5:45 बजे उदासीन आश्रम में मुनि श्री मार्दव सागर जी के सानिध्य में ब्रह्मचारी अनिलभैया, सुनील भैया, संजीव भैया कटंगी सहित अनेक ब्रह्मचारी भाइयों, बहनों तथा उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के बीच णमोकार मंत्र सुनते हुए उन्होंने मोक्ष लक्ष्मी का वरण किया।

संध्या 7:00 बजे तिलक नगर मुक्तिधाम पर उनका अग्नि संस्कार संपन्न किया गया। विगत दिनों से आश्रम के सभी ब्रह्मचारी भाई उनकी सेवा में तत्पर थे, जिसके परिणामस्वरूप उनकी समाधि शांत परिणामों के साथ सफलतापूर्वक पूर्ण हुई। मुनि स्वरूपानंद जी की समाधि पर समाजजनों ने गहन श्रद्धा व्यक्त की। डॉ. जैनेंद्र जैन, राजेश जैन दद्दू सहित अनेक श्रद्धालुओं ने विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मुनि श्री का जीवन त्याग, सेवा और संयम की सजीव मिसाल था।

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