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थूवोनजी में पहली बार — एक ही मंच पर 14 जैनेश्वरी ऐलक दीक्षा, इतिहास रच गया: “जब गुरु योग्यता देख लेते हैं तो उसे छिपाना अपराध है”—निर्यापकाचार्य श्री सुधासागरजी महाराज


दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में आज पहली बार एक ही मंच पर 14 जैनेश्वरी ऐलक दीक्षाएँ सम्पन्न हुईं। हजारों लोगों की मौजूदगी में श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म की ऐसी लहर उठी कि पूरा तीर्थ भावविभोर हो गया। यह आयोजन जैन समाज के लिए गौरव का क्षण बन गया। — श्रीफल साथी : राजीव सिंघई मोनू


थूवोनजी।आज दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में सचमुच इतिहास रच गया। परम पूज्य निर्यापकाचार्य श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के पवित्र कर-कमलों से एक ही मंच पर 14 जैनेश्वरी ऐलक दीक्षाएँ सम्पन्न हुईं। लगभग एक हजार साल पुराने इस पावन तीर्थ में ऐसा दिव्य दृश्य पहली बार देखने को मिला। जहाँ नजर जाती थी, वहाँ दर्शन, भक्ति और भावनाओं की लहर दिखाई दे रही थी। हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी।

समारोह में मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह यादव, नगर पंचायत अध्यक्ष नीरज मनोरिया सहित कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमा दी।

प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भइया ने कहा —

“सदियों के अंतराल के बाद आज थूवोनजी तीर्थ में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ रहा है। ऐलक दीक्षा का यह दृश्य श्रमण संस्कृति को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। यह केवल समाज के लिए नहीं, पूरे अध्यात्म जगत के लिए प्रेरणा है।”

इसके बाद निर्यापकाचार्य श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचनों से पूरा वातावरण शांत, गहन और ऊर्जावान बना दिया। उन्होंने कहा —

“आचार्य कुंदकुंद भगवान के बाद श्रमण संस्कृति को ऊँचाइयाँ देने का पवित्र कार्य आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज ने किया। जब गुरु योग्यता देख लेते हैं तो उसे छिपाना भी अपराध है। गुरु की आज्ञा के लिए मैं संसार में ही नहीं, आकाश में भी छेद कर दूँ — यही मेरे भाव हैं। आज तीज है और हम इन दीक्षार्थियों को मुक्ति का बीज प्रदान कर रहे हैं।”

नव दीक्षार्थीयो के नामों की घोषणा की निर्यापकाचार्य ने

जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि दीक्षा के संस्कार देने के बाद मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने नव दीक्षार्थी के नामों की घोषणा की

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज श्री के संघ में नवीन एलक जी

(1). एलक श्री 105 वरिष्ठ सागर जी महाराज

(2)एलक श्री 105 विदेह सागर जीमहाराज

(3)एलक श्री 105 सुज्ञान सागर ज़ी महाराज

(4)एलक श्री 105 सुयोग सागर जी महाराज

(5)एलक श्री 105 सुमेर सागर ज़ी महाराज

(6)एलक श्री 105 सुबोध सागर जी

(7)एलक श्री 105 सुनय सागर ज़ी

(8)एलक श्री 105 सुधर्म सागर ज़ी महाराज

(9)एलक श्री 105 सुयश सागर ज़ी महाराज

(10)एलक श्री 105 सुदया सागर ज़ी

(11)एलक श्री 105 सुवर्ण सागर ज़ी महाराज

(12)एलक श्री 105 सुविवेक सागर जी महाराज

(13) एलक श्री 105 सुशांत सागर ज़ी महाराज

(14)एलक श्री 105 सूचेतन सागर ज़ी महाराज

यह दिव्य आयोजन केवल दीक्षा समारोह नहीं, बल्कि अध्यात्म की नई ऊर्जा, समाज के नए संदेश और गुरु-शिष्य की अनंत परंपरा की शक्ति का अद्भुत प्रमाण बनकर उभरा। श्रद्धालु कह रहे थे — “यादें मिटती हैं, लेकिन आज का दृश्य जीवन भर याद रहेगा।”

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