गुमास्ता नगर परिसर में स्थित जिनालय में आचार्य सुंदर सागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका सुनयमती माताजी ससंघ विराजमान हैं। शनिवार को मंदिर में जिनाभिषेक एवं शांति धारा के पश्चात पंच परमेष्ठी विधान का आयोजन सतीश सुषमा सोनी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर आर्यिका सुनायमति माताजी के प्रवचन भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट….
इंदौर। गुमास्ता नगर परिसर में स्थित जिनालय में आचार्य सुंदर सागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका सुनयमती माताजी ससंघ विराजमान हैं। शनिवार को मंदिर में जिनाभिषेक एवं शांति धारा के पश्चात पंच परमेष्ठी विधान का आयोजन सतीश सुषमा सोनी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर आर्यिका सुनायमति माताजी ने कहा कि मुनि और श्रावक धर्म रथ के दो पहिए हैं। दोनों को अपने योग्यता अनुसार धर्म का पालन करना चाहिए। सांयकाल की सभा में बच्चों के लिए संस्कार शिविर आयोजित हुआ। जिसमें आर्यिका माताजी ने बताया कि बालक-बालिका देश का भविष्य हैं। उन्हें सभी नशीली वस्तुओं से दूर रहना चाहिए।
मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए, ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। धर्म सारे दुखों को दूर करता है। भगवान की भक्ति से पाप दूर होते हैं। बच्चों को पारितोषिक वितरित किया गया। इस अवसर पर पाठशाला की मुख्य शिक्षिकाएं प्रीति सिंघाई, शेफाली जटाले, शिल्पी जैन, निधि सिंघाई, मोनिका सिंघाई, राजुल पांड्या भी उपस्थित रहीं।













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