मुनि श्री सारस्वत सागर जी का 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को भिलवडी में भक्तिपूर्वक मनाया जाएगा। आपने मात्र 16 वर्ष की अल्पायु में भोपाल में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से 21 जून 2014 को ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे। आचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्धसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रुत सागर जी उपसंघ इंदौर से नांद्रे की ओर विहार कर रहें है। शनिवार को मुनिश्री सारस्वत सागर जी ससंघ दहिवडी में विराजमान हैं। नांद्रे निवासी अनिल पाचोरे ने बताया कि मुनि श्री सारस्वत सागर जी का 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को भिलवडी में भक्तिपूर्वक मनाया जाएगा। मुनिश्री सारस्वत सागर जी का बचपन का नाम भरत था। खाते-पीते घर के नन्हें से बालक भरत भैया को क्या सूझी कि छोटेपन में साधुओं की जमात में शामिल होने को छटपटा उठे। ‘मजना’ जैसी छोटी सी बस्ती में मुनिराजों का आना-जाना बहुत ही मुश्किल से हो पाता था, सो भरत भैया साधु सेवा की अपनी इच्छाएं टीकमगढ शहर में विराजमान मुनिराजों की सेवा करके ही पूरी कर पाते थे। मुनिश्री सारस्वत सागर जी का जन्म मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले के छोटे से ग्राम मजना में 1 जुलाई 1998 को हुआ। श्रावक विनयकुमार जैन और सुनीता जैन की इस प्यारी संतान भरत भैया की साधु सेवा और स्वाध्याय की मेहनत कुछ ऐसा रंग लाई कि वैराग्य कि निर्झरणी बहने लगी। आपकी लौकिक शिक्षा हाईस्कूल तक ही हो पाई कि आपने मात्र 16 वर्ष की अल्पायु में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से 21 जून 2014 को ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया। लगातार तीन वर्ष तक आपने संघस्थ ब्रम्हचारी रहकर गुरुमुख से शास्त्रों का अध्ययन किया एवं शास्त्रों की गाथाओं को कंठस्थ किया। आपने 6 अक्टूबर 2017 को इंदौर (मप्र) में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से अपार जनसमूह के समक्ष सीधे ही मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनिश्री सारस्वत सागर जी रखा गया।
मुनिश्री के चातुर्मास
मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज का मंगल वर्षायोग (चातुर्मास ) वर्ष 2018 में औरंगाबाद (महाराष्ट्र ), 2019 में भिंड (मध्य प्रदेश), 2020 में वैशाली बसकुंड (बिहार), 2021 में सम्मेद शिखरजी झारखंड, 2022 में रायपुर छत्तीसगढ, 2023 में बडोत (उत्तर प्रदेश), 2024 में सोलापुर (महाराष्ट्र) हुआ और 2025 का चातुर्मास नांद्रे (महाराष्ट्र) में होगा। आपके गृहस्थावस्था की बड़ी बहन आंचल जैन, बडे भाई शुभम जैन (लालू) और छोटे भाई साहिल जैन भैया भी निरंतर धर्मसाधना करते हुए शास्त्र स्वाध्याय में मग्न रहते हैं। मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज निरंतर स्वाध्याय, ध्यान, वैयावृत्ती में अपने समय का सदुपयोग करते रहते हैं। उन्हें हिंदी, संस्कृत और प्राकृत भाषा का अच्छा ज्ञान है। इस पंचमकाल में जबकि लोग व्रत, संयम तथा चारित्र पालन को कठिन समझते हैं, आपका जीवन एक महान आदर्श उपस्थित करके हम सबकी आंखे खोलने तथा चारित्र की ओर दृढतापूर्वक बढकर आत्मकल्याण करने एवं मानव जीवन को सफल बनाने की प्रेरणा देता है।













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