अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में पर्युषण पर्व के दसवें दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, संविद नगर, कनाडिया रोड पर मुनि श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार अतीन्द्रिय, आनन्द जहां पर उद्भूत होता है, वह जीव की ब्रह्मचर्य की दशा मानी जाती है। आत्म की प्राप्ति होना उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म कहा गया है। गुरु की आज्ञा में रहना और उनके मार्गदर्शन पर चलना भी ब्रह्मचर्य धर्म है। सादगी पूर्ण जीवन जीना, राग भाव का न होना और इन्द्रियों से नाता तोड़कर अपने आप को ध्यान के लिए तैयार कर लेना वास्तव में ब्रह्मचर्य धर्म है। पढ़िए रेखा संजय जैन की यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के चातुर्मास धर्म प्रभावना रथ के चतुर्थ पड़ाव के 17वें दिन व पर्युषण पर्व के दसवें दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, संविद नगर, कनाडिया रोड पर बड़े ही हर्षोल्लास के साथ धर्म प्रभावना हुई।
सर्वप्रथम श्रीजी के अभिषेक और शांति धारा हुई। तत्पश्चात मंगलाचरण की प्रस्तुति महावीर सेठ ने दी।
मुनि श्री के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट के पुण्यार्जक मनोज पहाड़िया रहे। भगवान वासुपूज्य का निर्माण लाडू भी चढ़ाया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा दसलक्षण धर्म का अंतिम परंतु सबसे प्रभावी लक्षण है उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म।
शास्त्रों के अनुसार अतीन्द्रिय, आनन्द जहां पर उद्भूत होता है, वह जीव की ब्रह्मचर्य की दशा मानी जाती है। आत्म की प्राप्ति होना उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म कहा गया है।
गुरु की आज्ञा में रहना और उनके मार्गदर्शन पर चलना भी ब्रह्मचर्य धर्म है। सादगी पूर्ण जीवन जीना, राग भाव का न होना और इन्द्रियों से नाता तोड़कर अपने आप को ध्यान के लिए तैयार कर लेना वास्तव में ब्रह्मचर्य धर्म है।
ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करने से शक्ति का संचार होता है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और चेहरे पर चमक आती है। पश्चिम सभ्यता को अपनाने वाला कभी भी ब्रह्मचर्य धर्म का पालन नहीं कर सकता है।
ब्रह्मचर्य को बहुत सरल शब्दों में समझना चाहें तो यह कह सकते हैं कि जो परिवार और समाज के संस्कार और संस्कृति को अपना लेगा, वही ब्रह्मचर्य धर्म का निर्वाह कर सकता है।
देव गति में देवो के लिए तो स्पष्ट वर्णन आया है कि स्पर्श, रूप, शब्द और मन से मैथुन हो जाता है। मनुष्य में हम देखते हैं किस प्रकार से पश्चिम संस्कृति के कारण हमारे आप-पास का वातावरण खराब होने के कारण मन, वचन और काय से विकार भाव हो जाते हैं, वासना का भाव जाग जाता है।
ब्रह्मचर्य धर्म के निर्वाह के लिए इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने के साथ ही भारतीय संस्कार और संस्कृति ग्रहण करने का भाव पैदा करना होगा। तभी हम ब्रह्मचर्य को जीवन में आत्मसात कर पाएंगे।
ये भी रहे मौजूद
इस अवसर पर धर्म सभा में पधारे मनोज जैन सिटी इंजीनियर नगर निगम का स्वागत तल्लीन निशा बड़जात्या पारस चैनल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष एल.सी. जैन, सचिव महावीर जैन, पवन मोदी, महावीर सेठ, सत्येंद्र जैन, आनंद पहाड़िया, राजेश जैन, लाल मंदिर कनाडिया रोड महिला मंडल, कमलेश जैन, टीना जैन, व अन्य समाजजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन महावीर जैन ने किया।













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