आरोप परख, आलोचात्मक, अपमान जनक आदेशात्मक इन चार सूत्रों का ध्यान रखते हुए यदि आप अपने वचनों का ध्यान रखेंगे तो आप विनम्रता की प्रतिमूर्ति कहलायेंगे। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने व्यक्त किए। शनिवार को प्रातः 6 बजे मुनिसंघ का मंगलविहार पिपलानी दिगंबर जैन मंदिर होते हुए सोनागिरि कॉलोनी की ओर होगा। भोपाल से पढ़िए, यह खबर…
भोपाल (अवधपुरी)। आरोप परख, आलोचात्मक, अपमान जनक आदेशात्मक इन चार सूत्रों का ध्यान रखते हुए यदि आप अपने वचनों का ध्यान रखेंगे तो आप विनम्रता की प्रतिमूर्ति कहलायेंगे। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया शनिवार को प्रातः 6 बजे मुनिसंघ का मंगलविहार पिपलानी दिगंबर जैन मंदिर होते हुए सोनागिरि कॉलोनी की ओर होगा तथा प्रातःकालीन मंगल प्रवचन एवं आहार चर्या उपरांत वापस अवधपुरी लौट आएंगे एवं सांयकालीन शंका समाधान होगा। रविवार को प्रातः 8.30 बजे प्रवचन के बाद विद्याप्रमाण गुरुकुलम् टीम द्वारा आमंत्रित करते हुए भोपाल जैन समाज बंधुओं के साथ 10.30 बजे से दीपावली मिलन समारोह रखा गया है तथा सभी के लिये भोजन व्यवस्था की गई है।
मुनि श्री ने कहा कि पूछताछ किए बिना सीधे-सीधे आरोपात्मक भाषा का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए जो बात आपको अच्छी नहीं लगती, वह बात दूसरों को भी अच्छी नहीं लगेगी। कोई भी घटना घटे तो तुरंत अप्रिय बात मत करो। उसे भी अपनी बात रखने का अवसर दीजिये। गलत का प्रतिकार गलत तरीकों से नहीं हो सकता है। दूसरा है आलोचात्मक शब्दों का प्रयोग न करते हुए उसे गल्ती का अहसास कराओ। आलोचात्मक शव्दों के प्रयोग से बात और बिगड़ेगी और वह आलोचना सुनकर आपसे दूर हो जाएगा। उदाहरण के लिए मान लीजिए घर में पत्नी या बहु ने सब्जियां बनाई और मिर्च ज्यादा हो गयी तो सीधे-सीधे वह बात न कहते हुए कह दो कि खाना बहुत अच्छा बना है, पर आज खाना बनाते समय शायद मन इधर-उधर भटक गया होगा इसलिए मिर्ची ज्यादा हो गई। इससे आपने अपनी बात भी कह दी और उसे बुरा भी नहीं लगा। इसीलिए कहा गया है कि अच्छा देखोगे और अच्छा बोलोगे तभी अच्छा होगा,बुरा बोलने बाले के कभी अच्छे परिणाम नहीं निकलते, बोलचाल में तो सदैव अमीरी झलकना चाहिये। संसार में जितने भी अमीर और अच्छे लोग है उनकी वाणी में सहजता और विनम्रता झलकती है। भले ही आप अमीर न भी हो लेकिन, बोलचाल में गरीब क्यों बनते हो? मुनि श्री ने कहा कि भले ही आपका वह कर्मचारी हो या ड्राइबर यदि आप उससे जी लगाकर बात करेंगे तो उसे भी अच्छा लगेगा और वह और अच्छे से कार्य को करेगा। उन्होंने कहा एक बात सदैव ध्यान रखना कि मान देने से ही मान मिलता है तथा अपमान करने वाला स्वतःअपमानित होता है। मुनि श्री ने कहा कि किसी को भी छोटा या तुच्छ मानकर व्यवहार मत करो जिससे कोई अपने आपको अपमानित महसूस करें। कभी-कभी अपमान करने से ऐसी गांठ बन जाती है, जो कि सर्वनाश का कारण बनती है। मुनि श्री ने कहा कि यह तो हमारे देश की संस्कृति है कि अपने से बड़ों को जी लगाकर तथा सम्मान सहित बोलने से सभी को अच्छा लगता है। कोई भी कार्य हो किसी के साथ आदेशात्मक भाषा के साथ उपयोग न करें।













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