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मुनि श्री गुरुदत्त सागरजी ने कहा-गुरु के बिना जीवन अधूरा : मुनिश्री ने गुरु महात्तम से कराया परिचय 


दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागरजी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। जैन समाज ने श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ इस महोत्सव को मनाया। महरौनी से पढ़िए राजीव सिंघई kin, यह खबर…


महरौनी। नगर के दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागरजी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। जैन समाज ने श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ इस महोत्सव को मनाया। इस अवसर पर प्रवचन देते हुए मुनिश्री गुरुदत्त सागर जी ने कहा कि गुरु के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा होता है क्योंकि, जिसके जीवन में कोई गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू ही नहीं होता। गुरु ही वह शक्ति हैं, जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञानता से ज्ञान की ओर तथा भोग से योग की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु वही होता है जो हमें संसार से मोक्ष मार्ग की ओर प्रवृत्त करता है। गुरु के चरणों में जो आनंद प्राप्त होता है, वह स्वर्गों में भी दुर्लभ है। मुनि श्री मेघदत्त सागरजी ने भी गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरु, ईश्वर से भी महान और पूजनीय हैं क्योंकि, ईश्वर को हमने नहीं देखा लेकिन, गुरु का साक्षात दर्शन होता है और उनसे प्राप्त मार्गदर्शन से जीवन का कल्याण होता है। पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं और गुरु चरणों में वंदनकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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