मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी का दीक्षा दिवस 6 नवंबर 2025 को रुकडी (महाराष्ट्र) में भक्तिपूर्वक मनाया जाएगा। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी के शिष्य मुनि संघ के सान्निध्य में यह आयोजन भक्ति, श्रद्धा और गुरुभक्ति का प्रतीक बनेगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
रुकडी (महाराष्ट्र)। पट्टाचार्य भगवन विशुद्ध सागर महाराज जी के शिष्य प.पू. मुनि श्री 108 सारस्वत सागर जी महाराज, प.पू. मुनि श्री 108 जयंत सागर जी महाराज, प.पू. मुनि श्री 108 सिद्ध सागर जी महाराज जी उपसंघ वर्तमान में रुकडी (महाराष्ट्र) में विराजमान हैं।
गुरुदेव के परमभक्त श्री राहुल पाटील (रुकडी) ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी के लघुनंदन श्रमण मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी का दीक्षा दिवस 6 नवंबर 2025 को श्री 1008 आदिनाथ भगवान जैन मंदिर (रुकडी) में बड़े भक्तिभाव से मनाया जाएगा। इस अवसर पर वीर सेवा दल, वीर महिला मंडळ तथा महावीर तरुण मंडल संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।
भारत की पावन वसुंधरा को अनेक ऋषि-मुनियों ने अपनी साधना और पवित्र चरणों की धूल से धन्य किया है। इसी पवित्र परंपरा में एक और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ा जब भिंड (म.प्र.) निवासी सौभाग्यशाली दंपत्ति श्री सुरेंद्र कुमार जैन एवं श्रीमती अनिता जैन के घर 14 जून 1996 को पुत्र रत्न का जन्म हुआ, जिसका नाम रखा गया विशाल।
यह वही विशाल हैं जिन्होंने 6 नवंबर 2022 को रायपुर (छत्तीसगढ़) में आचार्य भगवन विशुद्ध सागर जी महाराज के करकमलों से मुनि दीक्षा ग्रहण कर मुनि श्री जयंत सागर जी का नाम पाया। दीक्षा के बाद से मुनि श्री जयंत सागर जी ने गुरु आज्ञा को ही सर्वोपरि मानते हुए जिनधर्म की प्रभावना के लिए संपूर्ण देश में प्रवास किया है।
उनके प्रवचन सदैव गुरुभक्ति से ओतप्रोत रहते हैं। सरलता, सहजता और सौम्यता की प्रतिमूर्ति मुनि श्री जयंत सागर जी ध्यान में लीन रहते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर हैं। उनकी ओजस्वी वाणी और प्रेरक प्रवचन समाज को धर्म की नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।
दीक्षा दिवस के इस पावन अवसर पर मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि “मुनि श्री जयंत सागर जी जैसे संत आत्मानुशासन और साधना की जीवित प्रतिमूर्ति हैं।”
इस शुभ अवसर पर विशुद्ध सागर परंपरा के अनन्य भक्त श्री अभिषेक अशोक पाटील (कोल्हापुर) ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि “आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक, आज्ञानुवर्ती शिष्य श्रमण मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज के तृतीय दीक्षा दिवस पर मैं और मेरा परिवार उनके चरणों में कोटि-कोटि नमोस्तु अर्पित करते हैं।”
मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज के इस विशेष अवसर पर रुकडी सहित आसपास के क्षेत्रों में भक्तिभाव और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया है, जो गुरु-शिष्य परंपरा की अमर ज्योति को और अधिक उज्जवल बना रहा है।













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