सारांश
श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में विराजमान पूज्य मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने रविवार को स्वस्थ जीवनशैली पर प्रवचन देते हुए कहा कि इस रोग युग में मुख्यतः प्रत्येक व्यक्ति रोगों से पीड़ित है। इन सब का मुख्य कारण है हमारी दैनिकचर्या।
कुण्डलपुर । श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में विराजमान पूज्य मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने कहा है कि जिस काल में जो कार्य करना चाहिए वह ना करके उसी कार्य को किसी अन्य काल में करना ही अकाल मृत्यु का कारण बनता है। इस रोग युग में मुख्यतः प्रत्येक व्यक्ति रोगों से पीड़ित है। इन सब का मुख्य कारण है हमारी दैनिकचर्या। हमारी दिनचर्या प्रभु भजन (भक्ति) से प्रारंभ हुआ करती थी और प्रभु भजन (भक्ति) से ही इसका समापन होता था। परंतु आज भोजन (भुक्ति) से प्रारंभ और भोजन (भुक्ति) से समापन होता है। भुक्ति से मात्र रोगकथा ही हो सकती है।
हर तरह रोगमय वातावरण है
मुनिश्री ने कहा कि आज जहां देखो वहां रोगमय वातावरण है और रोगमय पर्यावरण है। आज व्यक्ति अपने रोग का वैभव सुनाते समय अपने आप को बड़ा गौरवान्वित महसूस करता है। प्रायः करके सभी जगह यही सुनने को मिलता है कि मुझे इतने बड़े-बड़े रोग हैं। मुझे इतनी महंगी दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। मुझे इतना महंगा उपचार चल रहा है। मैं इतने बड़े डॉक्टर का पेशेंट हूं। मैं इतने बड़े चिकित्सालय में भर्ती रहा आदि आदि। उस व्यक्ति के मुख से यह सब सुनकर ऐसा लगता है जैसे उस रोगी को किसी राजा का वैभव प्राप्त हो गया हो व्यक्ति राजा महाराजाओं की तरह ठाट बाट के साथ वह उस वैभव की चर्चा करता है।
जीवन फ्रिज से शुरू होकर इसी पर खत्म हो रहा है
मुनिश्री ने कहा कि हमारी दैनंदिनी क्रियाएं अगर व्यवस्थित हो जाएं तो हमारा जीवन व्यवस्थित होने में समय नहीं लगेगा। जीव विज्ञान तो आज खूब पढ़ा जा रहा है परंतु जीवन विज्ञान की ओर दृष्टि नहीं जा रही है। जीवन विज्ञान के महत्वपूर्ण अंग हैं- शयन विज्ञान ,आहार विज्ञान, विहार विज्ञान, निहार विज्ञान आदि आदि। सही समय पर किए गए कार्य आपको सफलता प्रदान करते हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ रहना चाहता है ,परंतु स्वस्थ रहने के उपाय को अपनाना नहीं चाहता। आज हमारा जीवन फ्रिज से शुरु और फ्रिज से ही समाप्त हो रहा है। आहार की तरोताजगी ही हमारे जीवन में तरोताजगी ला सकती है। फ्रिज का जीवन अपने आप को फ्रीज करना है। आज हमारे विचार, आचार (आचरण) ,आहार सब फ्रीज हो चुके हैं। कोल्ड स्टोर की सामग्री हमारे लिए कैंसर जैसे महारोग की आमंत्रण स्थली बन चुकी है।
जीवन विज्ञान को मत भूलना
मुनिश्री ने कहा कि जीवन को तरो-ताजा बनाना चाहते हो तो तरो-ताजा आहार शैली को ना भूलना। भूलना हो तो इस आधुनिकरण को भूल जाना पर भूल से भी जीवन विज्ञान को नहीं भूलना। जिसने जीवन विज्ञान को समझ लिया है उसने जीवन जीने की कला और मरण की कला को सीख लिया है। सभी कार्य को सही काल में करने से ही वे कार्य सही कार्य की श्रेणी में आते हैं वरना नहीं।













Add Comment