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आचार्य श्री विहर्ष सागर महाराज का चातुर्मासिक प्रवचन : माताएं अपने बच्चों को मालिक बनाने के लिए पैदा करें, नौकर नहीं 


महापुरुषों में भी क्रांति करने वाले बहुत कम ही हुए हैं। समाज का चिंतन करने वाले बिरले ही होते हैं। जब समाज में बुराइयां बढ़ती है, तो दूसरा गुट समाज उसका फायदा उठाता है। अज्ञानी लोग दूसरे को बादशाह बना देते हैं। आजकल के मां बाप चाहते है हमारा बेटा अच्छी क्वालिटी का नौकर बने यानी इंजीनियर ,डॉक्टर वे भी नौकर ही हैं। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


 इंदौर। महापुरुषों में भी क्रांति करने वाले बहुत कम ही हुए हैं। समाज का चिंतन करने वाले बिरले ही होते हैं। जब समाज में बुराइयां बढ़ती है, तो दूसरा गुट समाज उसका फायदा उठाता है। अज्ञानी लोग दूसरे को बादशाह बना देते हैं। क्या कभी समाज ने किसी जैन को नेता बनाने में मदद की, नहीं टांग खिंचाई कर हराने में जरूर की, तभी आज हम पीछे रह गए। बहुत पहले एक गुरु ने कहा था कि पंचम काल में जैन लोग करेंगे चाकरी । आजकल के मां बाप चाहते है हमारा बेटा अच्छी क्वालिटी का नौकर बने यानी इंजीनियर ,डॉक्टर वे भी नौकर ही हैं। हे माताओं जब किसी भगवान की माता आपको मिलेगी और पूछेगी अपने बेटे को क्या बनाया तो कह देना नौकर। यह कहना है आचार्य श्री विहर्ष सागर महाराज का।

मति पर कंट्रोल करें 

उन्होंने कहा कि तीर्थंकर की माताओं ने सिंह प्रवृत्ति का एक ही लाल बेटा पैदा किया जिसे आज दुनिया पूजती है। उन्होंने कहा मन हमारा घर है, मन की गाड़ी कौन चलाएगा? गुरुदेव से कहो आपको हम दिल में नहीं मन में बैठाएंगे। मति पर कंट्रोल करना, क्योंकि मति से गति बिगड़ती है। हे ईश्वर मेरी मति का ध्यान रखना। प्रभु की वाणी अज्ञानता को हर लेती है। उन्होंने माताओं से कहा कि बेटा पैदा करो तो मालिक बनाने के लिए करना, नौकर बनाने के लिए नहीं। आपके बेटे को देखकर दुनिया कहे कि इसकी मां कौन है और उसके साथ चलने में आपको भी गर्व महसूस हो।

हम संकीर्ण हो गए 

संकलेषता को मन से मुक्त करो। हम संकीर्ण हो गए। जिसकी कथनी और करनी में भेद न हो वही भगवान महावीर का सच्चा सेवक भक्त है। मुनि श्री विश्व हर्ष सागर महाराज ने कहा कि हमेशा देव, शास्त्र, गुरु के प्रति श्रद्धा रखना चाहिए। जरा सी भी प्रतिकूलताएं आती हैं तो आपकी श्रद्धा कम हो जाती है। हमारे भगवान वीतरागी हैं। आपको उनसे मांगने की जरूरत नहीं, आप की भक्ति में इतनी शक्ति होना चाहिए कि आप जो चाहो वह आपको मिल जाए। बिना पुण्य के सांसारिक कार्य भी पूर्ण नहीं होते। पुण्य कम हुआ तो कार्य बिगड़ना शुरू हो जाते हैं। आप लोग बच्चों को केवल लौकिक शिक्षा देकर पैसा कमाने की मशीन बनाना चाहते हो।

आप में से अभी बहुत कम लोग श्रावक होंगे, आप अभी ग्रहस्थ हो। कल्याण चाहते हो तो श्रावक जरूर बनो। धर्म सभा में मंगलाचरण पंडित रमेश चंदजी बांझल के द्वारा किया गया। आचार्य श्री के चित्र अनावरण के बाद दीप प्रज्जवलन किया गया। फैडरेशन के मीडिया प्रभारी राजेश जैन ने बताया कि आज आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार करने का सौभाग्य सुधीर-सुषमा अजमेरा को एवं मुनि श्री विश्व हर सागर महाराज जी को आहार कराने का सौभाग्य प्रवेश सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। जगदलपुर एवं अंबाह से आए हुए समाज श्रेष्ठियों का अभिनंदन चतुर्मास कमेटी द्वारा किया गया। इस अवसर पर संजीव जैन संजीवनी, प्रवीण जैन, नीरज मोदी, योगेंद्र काला, मनोज सिंघई, प्रिंसपाल टोंग्या, राजेश गंगवाल पारस पांड्या आदि विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन कमल काला ने किया।

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