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सवा सौ से अधिक बच्चों ने भगवान जिनेंद्र का किया पूजन: बाल संस्कार शिविर के तहत भक्ति में रमे बच्चे


चुंगी नाका स्थित श्री महावीर जिनालय परिसर में रविवार को बाल संस्कार शिविर में सवा सौ से अधिक बच्चों ने सामूहिक भगवान जिनेंद्र का पूजन किया। यह कार्यक्रम बालिका मंडल के तत्वावधान में किया गया। बच्चों की यह भक्ति देखकर सभी अभिभूत हो गए। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…


अंबाह। चुंगी नाका स्थित श्री महावीर जिनालय परिसर में रविवार सुबह एक दुर्लभ और भावविभोर कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। जब छोटे-छोटे बच्चों ने सामूहिक रूप से जिनेंद्र भगवान का विधिवत पूजन किया। यह कार्यक्रम बालिका मंडल के तत्वावधान में बाल संस्कार शिविर में किया गया। इसमें 125 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को धर्म से जोड़ना और उनमें जैन संस्कृति व जिनवाणी के संस्कार विकसित करना था। सुबह 8 बजे जैसे ही बच्चों ने पूजा प्रारंभ की, मंदिर परिसर ‘नमो अरिहंताणं, नमो सिद्धाणं’ जैसे मंगलकारी मंत्रों की दिव्य गूंज से पावन हो गया। बच्चे पूरी श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति के साथ पूजन में लीन दिखाई दिए। मंदिर में उपस्थित श्रद्धालु भी उस दृश्य को अपलक निहारते रहे। जब बालक-बालिकाओं की यह अनुशासित टोली भक्ति में रम गई। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि आने वाली पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश करता है। शिविर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस शिविर को अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक बताया।

बालिका मंडल प्रमुख राजुल जैन ने कहा आज धर्म की रक्षा का सबसे सरल उपाय यही है कि हम बच्चों को मंदिर लाएं, पूजा कराएं और उन्हें धर्म का महत्व समझाएं। श्रीकृष्ण जैन ने कहा कि यह दृश्य वर्षों बाद देखने को मिला। जब जिनालय बाल स्वर से गूंज उठा। उन्होंने पूजन शिविर को धर्म, सेवा और संस्कारों का संगम बताया। मंदिर ट्रस्ट और आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावी दाताओं एवं माता-पिता का आभार जताते हुए कहा कि इस आयोजन से यह सिद्ध हो गया है कि यदि प्रयास सतत और समर्पण से भरे हों, तो बच्चों को भी धर्म की धारा से सहजता से जोड़ा जा सकता है। राहुल जैन, कपिल जैन ने कहा पूजन शिविर ने यह प्रमाणित किया कि आज के डिजिटल युग में भी अगर दिशा और संस्कार मिलें, तो बालमन धर्म की गहराइयों में उतर सकता है।

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