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वह जगह, जहां की वंदना करने पर एक करोड़ उपवास का फल मिलता है: भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस धूमधाम से मनाया 


21 वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस बुधवार को सिद्धाचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया गया। 108 मुनि श्री मंगलानंद सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा भगवान नेमिनाथ का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया गया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


ग्वालियर। 21 वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस बुधवार को सिद्धाचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया गया। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह ने बताया कि 108 मुनि श्री मंगलानंद सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा भगवान नेमिनाथ का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया गया। उसके बाद विधान, पूजन और निर्माण लाडू चढ़ाया गया। फिर स्वल्पाहार और फलाहार की व्यवस्था की गई थी। संत निवास के लिए नींव रखी गई।

महाराज ने प्रवचन करते हुए बताया कि 2451 वर्ष के केवली काल के बाद, जब आयुकर्म एक माह शेष रह गया तब 21वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ जी पहुंच गए श्री सम्मेद शिखरजी और वैशाख कृष्ण की चतुर्दशी, जो इस वर्ष 19 अप्रैल को है, उसी दिन खड़गासन से 1000 मुनिराजों के साथ मित्रधर कूट से सिद्धालय गए। इनका तीर्थ प्रवर्तन काल 5 लाख, 1800 वर्ष का रहा। मित्रधर कूट की निर्मल भाव से वंदना करने से एक करोड़ उपवास का फल मिलता है और इसी कूट से 900 कोड़ाकोड़ी, एक अरब, 45 लाख, 7 हजार 940 मुनिराज सिद्धालय गए हैं ।

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