लुधियाना शहर की 43 वर्षीय मेघा पंजाब से एकमात्र साइकिलिस्ट हैं, जिन्होंने श्रीनगर से कन्याकुमारी तक की 4049 किमी लंबी दूरी मात्र 17 दिन में पूरी कर ऐसी उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसे पाना कितने की संघर्षों का सामना करने के बाद भी आसान नहीं होता। लुधियाना से पढ़िए, यह स्पेशल रिपोर्ट….
लुधियाना। जुनून और लक्ष्य के प्रति गंभीरता से पूरी लगन और मेहनत की जाए तो कठिन से कठिन मंजिल भी कदमों में हो सकती है। इसे सच में साबित किया है शहर की एक ऐसी साइकिलिस्ट मेघा जैन ने, जो नारी की हिम्मत और जज्बे की मिसाल बन गई। लुधियाना शहर की 43 वर्षीय मेघा पंजाब से एकमात्र साइकिलिस्ट हैं, जिन्होंने श्रीनगर से कन्याकुमारी तक की 4049 किमी लंबी दूरी मात्र 17 दिन में पूरी कर ऐसी उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसे पाना कितने की संघर्षों का सामना करने के बाद भी आसान नहीं होता। श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन से बातचीत में उन्होंने बताया कि मैंने सोचा भी नहीं था कि आपको इंटरव्यू देने के बाद यह ड्रीम राइड इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस साइकिल यात्रा के दौरान कठिन पहाड़ी रास्ते, बदलता मौसम, अनगिनत चढ़ाइयां और शारीरिक चुनौतियां थीं, लेकिन दृढ़ संकल्प, हिम्मत और निरंतर प्रयत्न से इस मुकाम को हासिल किया है। जो ऐसा माइल स्टोन है, जिसे हासिल करना केवल सपना ही रहता है, लेकिन यह पूरा हुआ। यह ऐतिहासिक राइड डेयर 2 गियर द्वारा फिट इंडिया के सहयोग से आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि यह साइकिल यात्रा सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती को समर्पित थी। देशभर से चुने गए 150 साइकिलिस्टों ने इस राइड फॉर यूनिटी में भाग लिया था। जिनमें मेघा जैन का प्रदर्शन प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि 19 से 69 वर्ष के साइकिलिस्टों के समूह में हर पड़ाव पर अदम्य साहस, अनुशासन और मानसिक मजबूती से ही आज यह गौरव हासिल हुआ है। हिमालय की ठंड, मध्य भारत की गर्मी और दक्षिण के उमस भरे मौसम में दृढ़ इच्छा शक्ति से आगे लक्ष्य की ओर अग्रसर हुईं। कन्याकुमारी में आयोजित समापन समारोह में प्रिसिपल डॉ. जी किशोर ने मेघा जैन को सम्मानित किया। लुधियाना साइलिस्ट्सि ने भी इस उपलब्धि पर उनका सम्मान किया।
परिवार का सपोर्ट और जज्बे ने लक्ष्य तक पहुंचाया
श्रीफल जैन न्यूज से चर्चा के दौरान मेघा जैन ने रेखा संजय जैन को बताया कि परिवार का सपोर्ट ने ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जब शौक जिंदा रखना हो तो सब मैनेज करना पड़ता है। इसमें मेघा का परिवार हमेशा उनके साथ रहा। मेघा जैन का यह संपूर्ण सफर उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपने सपनों को सीमाओं में बांध देती हैं। वह यह सिखाती हैं कि जिम्मेदारियां और सपने एक साथ चल सकते हैं।
संघर्षों से गुजरकर मिली यह सफलता
मेघा बताती है कि यह सफलता संघर्षों से गुजरकर मिली है। यह सफलता उन्हें पंजाव की पहचान बनाती है, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए आइकॉन भी। मेघा 2017 से लंबी दूरी की साइकिलिंग कर रही हैं। ऑडेक्स इंडिया रैंडोनर्स से जुड़ी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑडैक्स क्ल पेरिसियन से संबद्ध है। अब तक 12 सुपर रैंडोनर सीरीज मेघा पूरी कर चुकी है, जो उत्तर भारत में किसी महिला द्वारा हासिल किया गया रिकार्ड है। मेघा ने विभिन्न टैंडम बाइक सीरीज को राइड पार्टनर डॉ.पवन ढिंगरा के साथ पूरी की। उन्होंने 1 हजार किमी दिल्ली से काठमांडू की राइड भी पूरी की है।
इनका आभार जताया
आयोजकों ने डीडीजी मयंक श्रीवास्तव, निदेशक डॉ. नदीम, पूरी फिट इंडिया टीम और डॉ. भैरवी नाइक जोशी (डायरेक्टर एवं सीइओ बाइक्स इंडिया फ़ाउंडेशन) के दृष्टिकोण, समर्थन और पूरे समन्वय के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। विशेष धन्यवाद अमित शर्मा जी को, जिन्होंने जयपुर तक आकर साइक्लिस्टों को प्रेरित किया और उनकी सुरक्षा के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय किया।
इन अतिथियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई
हर पड़ाव पर फिट इंडिया क्षेत्रीय समन्वयकर्ताओं ने गर्मजोशी से सवारों का स्वागत किया और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रखीं। कन्याकुमारी में समापन कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाले अतिथियों में डॉ. जी किशोर (प्रिंसिपल एवं रीजनल हेड,एसएआई एलएनसीपीई), बी. राधादेवी, विनू, सुभाष एस और विमल आनंद शामिल थे, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को और अधिक विशेष बनाया। जम्मू से अमन एवं उनकी टीम, लुधियाना से पुष्कर एवं उनकी टीम, निशा मैडम एवं उनकी टीम, राजस्थान और गुजरात से मधु एवं उनकी टीम, धर्मपुरी से विठ्ठल, डिंडीगुल से पचैयप्पन एवं उनकी टीम, और कन्याकुमारी से बाला गोपाल, डॉ. किशोर एवं उनकी टीम की उपस्थिति, सहयोग और समर्पण ने इस राष्ट्रीय यात्रा को और भी मजबूत बनाया। इस अभियान की डेयर 2 गियर की टीम ने चौबीसों घंटे मेहनत करते हुए लॉजिस्टिक्स, बाइक तैयारी, सुरक्षा, भोजन और दैनिक समन्वय को संभाला, जिससे सभी प्रतिभागी सुरक्षित और बिना किसी चोट के अपनी यात्रा पूरी कर सके।













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