समाधिस्थ भारत गौरव आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य श्री विद्यासागर संत निलय में अर्पितमय पावन वर्षायोग चल रहा है। जहां 8 अगस्त को प्रातः काल की बेला में उपाध्यायश्री ने अपने हाथों से केशलोंच की क्रियाएं संपन्न कीं। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट…
आगरा। समाधिस्थ भारत गौरव आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य श्री विद्यासागर संत निलय में अर्पितमय पावन वर्षायोग चल रहा है। जहां 8 अगस्त को प्रातः काल की बेला में उपाध्यायश्री ने अपने हाथों से केशलोंच की क्रियाएं संपन्न कीं। इस दौरान वहां मौजूद सभी भक्तों ने मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री के इस केशलोंच की अनुमोदना की। उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ने बताया कि जैन मुनि क्यों करते हैं, केशलोंच जैन मुनि एक केशलोंच के बाद कम से कम 2 महीने और ज्यादा से ज्यादा 4 महीने में दूसरा केशलोंच करते हैं। ये उनकी तपस्या का अहम हिस्सा है।
जैन मुनि शरीर की सुंदरता को नष्ट करने और अहिंसा धर्म का पालन करने के लिए केशलोंच करते हैं। वे बालों को उखाड़ते समय यह भावना रखते हैं कि इस कष्ट के साथ उनके पाप कर्म भी निकल रहे हैं। इससे संयम की परीक्षा और पालन भी होता है। जैन मुनि केशलोंच वाले दिन उपवास रखते हैं। उनका मानना है कि केशों के लुंचन से बालों में होने वाले जीवों को हुए नुकसान और उनके कष्ट का प्रायश्चित हो सके।
इस अवसर पर जगदीश प्रसाद जैन, प्रदीप जैन पीएनसी, मनोज जैन बाकलीवाल, जैन रोहित जैन अंहिसा, अनिल रईस, नरेश जैन, अनिल जैन, अनुज जैन, शैलेंद्र जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन सहित समस्त ग्रेटर कमला नगर जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।













Add Comment