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भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर हुए कई कार्यक्रम: धार्मिक अनुष्ठानों की रही धूम


वर्धमान दिगंबर जैन मन्दिर पिपलाई एवं बामनवास ब्लॉक में स्थित सभी जैन मन्दिरों में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में वर्धमान दिगम्बर जैन विकास समिति के द्वारा जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक व पूजन विधान और शांतिधारा पाठ का आयोजन हुआ। बामनवास से पढ़िए जिनेंद्र जैन की यह खबर…


बामनवास। वैशाली की धरती से एक राजकुमार उठता है और संपूर्ण राजपाट का त्याग कर वैराग्य धारण कर मुनि बनकर सत्य की खोज करता है और वस्तु स्वरूप का पूर्ण सत्य ज्ञान करने के बाद पूरी दुनिया से कहता है कि तुम्हें यदि वास्तव में अपनी रक्षा करनी है तो तुम्हें किसी की शरण में जाने की जरूरत नहीं है। तुम्हें स्वयं अपनी आत्मा की शरण में जाने की जरूरत है। तभी तुम्हारा कल्याण होगा। ऐसे व्यक्तित्व भगवान महावीर स्वामी का आज हम 2624 वां जन्म कल्याणक महोत्सव मना रहे हैं। जो अपने भक्तों को भगवान बनने तक का मार्ग बताते हैं। लोक बंधुत्व के दृष्टिदाता भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर वर्धमान दिगंबर जैन मन्दिर पिपलाई एवं बामनवास ब्लॉक में स्थित सभी जैन मन्दिरों में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में वर्धमान दिगम्बर जैन विकास समिति के द्वारा सुबह 6 बजे जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक व पूजन विधान और शांतिधारा पाठ का आयोजन हुआ। दोपहर को वर्धमान दिगम्बर जैन विकास समिति के द्वारा जिनेन्द्र कोचिंग सेन्टर के विधार्थियों को मिठाई का वितरण किया। ब्लॉक सभी मन्दिरों शाम को भजन, सामूहिक आरती,शास्त्र प्रवचन आदि धार्मिक कार्यक्रमों में श्रावक-श्राविकाएं भक्तिरस में डूबे रहे।

केवल खुद को जानने की कोशिश करना

इस अवसर पर दिगम्बर जैन मन्दिर के पदाधिकारी बृजेन्द्र कुमार श्रीमाल और सुनिल जैन ने बताया कि महावीर होने का मतलब गलत बात और पाखंड को स्वीकार न करना एवं ऐसा कोई भी क्रिया कांड न करना जिससे दूसरे जीवों को जरा सी भी तकलीफ हो। महावीर होने का मतलब है केवल खुद को जानने की कोशिश करना और अपनी शुद्ध आत्मा का अनुभव करना। करुणा,दया और सेवा की भावना से सभी जीवों के जीने के अधिकारों की रक्षा करना तथा दूसरों को क्षमा कर देना और अपने अपराधों की क्षमा मांगना है यदि आप ऐसा कर सकते हैं तो भगवान महावीर कहते हैं कि आप भी महावीर बन सकते हैं। इस अवसर पर सुमनलता जैन, आशा देवी जैन,जिनेन्द्र जैन,भव्य जैन आदि सहित कई श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।

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