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आचार्यश्री ज्ञानसागर जी के षष्ठम समाधि दिवस पर कई कार्यक्रम : अलग-अलग भाषाओं में गीत संगीत के माध्यम से भावनाएं की व्यक्त 


आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज के षष्ठम समाधि दिवस के उपलक्ष्य में हजारों प्राच्य जैन सराक बंधुओं, महिला, बाल- गोपाल एवं सराक क्षेत्र के जैनेतर गुरुभक्तों की उपस्थिति में विशाल समारोह रखा गया। रघुनाथपुर से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की यह खबर…


रघुनाथपुर (पश्चिम बंगाल)। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज के षष्ठम समाधि दिवस के उपलक्ष्य में हजारों प्राच्य जैन सराक बंधुओं, महिला, बाल- गोपाल एवं सराक क्षेत्र के जैनेतर गुरुभक्तों की उपस्थिति में विशाल समारोह रखा गया। जिसमें अपने गुरु से प्राप्त मार्गदर्शन पर चलने तथा उनके आशीर्वाद से किए जा रहे समाज उत्थान कार्याें को आगे बढ़ाने के लिए सतत् प्रयासरत रहने की भावना व्यक्त की गई। गुरु भक्ति में बंगाल, उड़ीसा और झारखंड प्रांत से पधारे सभी ने अपने प्रथम दिगंबर गुरु, वर्तमान समय में भगवान स्वरुप, हमारे दुःख-पीड़ा को समझने वाले महामानव किस पुण्योदय से हमारे बीच अल्प समय के लिए आए थे और समय रहते हमें छोड़कर देवलोक प्रस्थान कर गए। ऐसी भावना अपनी-अपनी भाषा में भजन संगीत, वाचन के माध्यम से प्रस्तुत की गई। बालिकाओं ने नृत्य के साथ भक्ति प्रस्तुत की। कार्यक्रम आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिकारत्न श्री सुज्ञानमति माता जी के आशीर्वाद से बाल ब्रम्हचारीणी मंजुला दीदी के निर्देशन में श्री ज्ञानसागर गुरु भक्त परिवारों के सहयोग से भाव दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं प्राच्य श्रावक श्रमण समिति सराक क्षेत्र के संयोजन से संपन्न हुआ।

प्रतियोगियों को पुरस्कार प्रदान किए

कार्यक्रम में गुरुदेव के कृतित्व पर निबंध प्रतियोगिता, चित्र अंकन, गुरु मंदिर सजाओ, आरती थाली सजाओ आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी को सम्मानित किया गया। पुरस्कार मंजुला दीदी ने प्रदान किए। प्राच्य श्रावक श्रमण समिति के पदाधिकारी पुटुक जैन, रमेशचंद जैन, गयाराम जैन, युधिष्ठिर जैन, संजय जैन, सृष्टिधर जैन, असित लायेक किरीटी, भूषण जैन, जितेंद्र जैन, तापस जैन, लिल्टू जैन, गौरांग जैन, रामदुलाल जैन, विद्युत जैन के साथ-साथ सभी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ट्रस्ट की ओर से संजय कुमार पाटनी ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

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