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मनोरमा जैन बनी क्षुल्लिका श्री वासु पूज्यमति माताजी: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा में दी क्षुल्लिका दीक्षा


रविवार को बूंदी के संपतलाल अजमेरा की धर्मपत्नी मनोरमा जैन 72 वर्ष ने आचार्य श्री से दीक्षा की याचना की। आचार्य श्री ने उन्हें दीक्षा प्रदान कर उनका नया नाम क्षुल्लिका श्री वासुपूज्यमति माताजी किया। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


पदमपुरा। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज पदमपुरा में विराजित हैं। रविवार को बूंदी के संपतलाल अजमेरा की धर्मपत्नी मनोरमा जैन 72 वर्ष ने आचार्य श्री से दीक्षा की याचना की।

आचार्य श्री ने उन्हें दीक्षा प्रदान कर उनका नया नाम क्षुल्लिका श्री वासुपूज्यमति माताजी किया। इस अवसर पर आचार्य श्री संघ के साधु गणिनी श्री सरस्वती मति माताजी, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी और संघ के श्रावक-श्राविकाएं मंदिर कमेटी के पदाधिकारी, परिजन सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी ने इसके पूर्व 118 दीक्षा दी हैं।

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