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चातुर्मास पूर्ण तीन स्थानों से जैन संतों का मंगल विहार: श्रद्धालुओं की नेत्रों से अविरल अश्रुधारा के बीच भावभीनी दी विदाई 


गृहस्थ जीवन में, श्रवण जीवन में अंतर मिला, हमें मनुष्य जीवन मिला, इसे सार्थक करना हमारा सबका दायित्व है। जीवन में कठिनाइयों से डरने के बजाय मुकाबला करेंगे तो नई राह खुलेगी। यह विचार आचार्यश्री नयरत्नसागर जी महाराज ने विदाई के अवसर पर व्यक्त किए। इंदौर से पढ़िए, साभार यह खबर…


इंदौर। गृहस्थ जीवन में, श्रवण जीवन में अंतर मिला, हमें मनुष्य जीवन मिला, इसे सार्थक करना हमारा सबका दायित्व है। जीवन में कठिनाइयों से डरने के बजाय मुकाबला करेंगे तो नई राह खुलेगी। यह विचार आचार्यश्री नयरत्नसागर जी महाराज ने विदाई के अवसर पर व्यक्त किए। तिलकनगर जैन मंदिर से चातुर्मास संपन्न कर वे ऋषभसागर जी, अजीतसागर जी सहित 18 शिष्यों के साथ हाईलिंक सिटी स्थित श्री धरणीधर पार्श्वनाथ जिनालय स्थित अमित आराधाना भवन पहुंचे। यहां पहले से विराजित साध्वी अमितगुणा श्रीजी मसा, उनकी शिष्या स्नेहझरा श्रीजी, पुण्यझरा श्रीजी ने उनकी अगवानी की। इस अवसर पर पुंडरीक पालरेचा, कपिल कोठारी, विशाल बम, जयंत खाबिया, वरुण कोठारी, अंकुश कटारिया उपस्थित रहे।

नम आंखों से साध्वियों और साधुओं को किया विदा 

इधर, श्री श्वेतांबर जैन पद्मावती पोरवाल संघ जंगमपुरा में चातुर्मास पूर्ण करने के बाद महासती धैर्यप्रभाजी मसा का विहार पोरवाल भवन से रामबाग दादाबाड़ी के लिए हुआ। साध्वी मंडल की विदाई की बेला में सभी श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा बह रही थी। प्रचार प्रमुख मुकेश जैन ने बताया कि विहार यात्रा में पोरवाल संघ अध्यक्ष विनोद जैन, मंत्री कमल जैन, चातुर्मास संयोजक पारस जैन, छगनलाल जैन आदि शामिल हुए। महावीर भवन इमलीबाजार से उपप्रवर्तक श्रुतमुनि महराज, तप शिरोमणि अक्षर मुनि महाराज, मधुर मुनि महाराज का चातुर्मास पूर्ण होकर प्रथम मंगल विहार का जुलूस महावीर भवन से प्रारंभ हुआ। राजवाड़ा, जवाहर मार्ग, राज मोहल्ला होते हुए भक्त प्रहलाद नगर स्थानक में पहुंचा।

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