बड़वानी में चातुर्मास में विराजित आचार्य विराग सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका मां विकुंदन श्री माताजी और संघस्थ क्षुल्लिका विश्व रत्न श्री माताजी का सोमवार को बड़वानी से धार जिले के गंधवानी की ओर मंगल विहार हुआ। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…
धामनोद। बड़वानी में चातुर्मास में विराजित आचार्य विराग सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका मां विकुंदन श्री माताजी और संघस्थ क्षुल्लिका विश्व रत्न श्री माताजी का सोमवार को बड़वानी से धार जिले के गंधवानी की ओर मंगल विहार हुआ। माताजी ने विगत चार माह में जैन समाज के श्रावकों और श्राविकाओं को धर्म की कई बारीक और जीवन उत्थान की छोटी-छोटी बाते सिखाईं और समझाई। साथ ही अपने वात्सल्य मय आशीर्वाद से पूरे समाज को सम्मोहित कर धर्म की राह पर लगाने का पूर्ण प्रयास किया। माताजी द्वारा रोजाना सबेरे, दोपहर और शाम को अलग-अलग विषयों पर क्लास ली और धर्म की क्रियाएं अभिषेक, मंगलाष्टक, तत्त्वार्थ सूत्र, बारह भावना, मेरी भावना और आनंद यात्रा के माध्यम से धर्म की गूढ़ बातों को सरलीकृत कर समझाया और सभी को मंगल आशीर्वाद दिया तथा धर्म की राह पर चलने की सीख दी।
माताजी के मंगल विहार पर सभी समाज जन ने मंगल विदाई दी। माताजी के प्रति सभी को इतना अनुराग और मोह हो गया था कि उन्हें छोड़ने का किसी का मन नहीं कर रहा था। माताजी ने समझाया कि साधु तो बहते पानी के समान हैं। आज यहां सांझ है तो कल का सवेरा कही और होता है। चातुर्मास में ही जैन संत एक जगह विश्राम करके धर्म साधना करते है। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।













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